Sunday, May 7, 2017

डिजिटल हिंदूराष्ट्र में किसान और खेतिहर मजदूर आत्महत्या क्यों कर रहे हैं? पलाश विश्वास

डिजिटल हिंदूराष्ट्र में किसान और खेतिहर मजदूर आत्महत्या क्यों कर रहे हैं?

पलाश विश्वास

डिजिटल हिंदूराष्ट्र में किसान और खेतिहर मजदूर आत्महत्या क्यों कर रहे हैं? हरित क्रांति के बाद से लगातार गहराते कृषि संकट को सुलझाने के लिए क्या हिंदुत्व के एजंडे में कोई परिकल्पना है?इस सवाल का जबाव सत्ता वरग के किसी भी व्यक्ति से मिलना मुश्किल है क्योंकि ग्रामीण भारत और कृषि दोनों किसी भी तरह के विमर्श से बहार है।

सुनहले दिनों के ख्वाबों में हकीकत की जमीन पर नरेंद्र मोदी सरकार के पहले दो साल में कृषि वृद्धि दर का औसत 1.6 प्रतिशत रहा है। लगातार दो साल 2014 और 2015 में सूखा पड़ा, ऐसा करीब 100 साल से ज्यादा वक्त बाद हुआ है। सूखे का असर 10 से ज्यादा राज्योंं में रहा है, जिसकी वजह से पानी का संकट हुआ।

मुक्त बाजार की बहार में किसानों के मरने जीने से किसी को फर्क नहीं पड़ता और भोपाल गैस त्रासदी की निरंतरता जारी है। कीटनाशक दवाइयों बनाने के गैस भंडार से गैस लीक हो जाने से राजधानी दिल्ली में करीब ढाई सौ बच्चे बीमार हो गये हैं तो बाकी देश को यह बात अभीतक समझ में नहीं आ रहा है कि पूरा देश किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए मुकम्मल गैस भंडार में  तब्दील है।लेकिन जिस जहरीली गैस से कृषि संकट का निदान हरित क्रांति में सोचा गया है,वह भोपाल के बाद नई दिल्ली को भी संक्रमित कर रहा है तो यह समझना जरुरी है कि देहात का संकट नगरों और महानगरों को भी संक्रमित कर रहा है।

डिजिटल इंडिया में किसानों की आत्महत्या रुकने के बजाय बढ़ गयी है।ताजा आंकड़े इशारा करते हैं कि आत्महत्या करने वाले कुल किसानों में से 70 प्रतिशत से अधिक संख्या उन गरीब किसानों की है, जिनके पास दो हेक्टेयर से भी कम जमीन है।देस के वित्तीय प्रबंधकों के लिए बाजार का विस्तार सर्वोच्च प्राथमिकता पर है और राजकाज भी मुनाफे की अर्थव्वस्था से संचालित है।विकास का मतलब है समृद्ध और सत्ता के सवर्ण वर्ग का विकास और वृद्धि का मतलब भी समृद्ध और सत्ता के सवर्ण वर्ग की वृद्धि है। इस विकास और वृद्धि का बंद बूंद रिसाव से ही बहुसंख्य आम जनता की जिंदगी और उनका वजूद निर्भर है और तमाम आर्थिक सुधारों की दिशा भी वहीं है।

खेती और किसानों की समस्या सुलझाये बिना अंधाधुंध शहरीकरण और उपभोक्ता बाजार के विकास और वृद्धि की अर्थव्यवस्था में बहुसंख्य आबादी के लिए,किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए और देश की बुनियादी उत्पादन प्रमाली और नैसर्गिक स्थानीय रोजगार के लिए नीति निर्धारकों और चुने हुए जन प्रतिनिधियों के दिलो दिमाग में कोई जगह नहीं है।जाहिर है कि केंद्र सरकार के क्राइम रिकार्ड ब्यूरो(एनसीआरबी) की एक्सीडेंटल डेथ एंड सुइसाइड शीर्षक रपट के  आंकड़ों के मुताबिक भारत के हिंदू राष्ट्र डिजिटल इंडिया बन जाने के बाद 2014-15 के दौरान दो साल में देश के बारह हजार किसानों और खेतिहर मजदूरों ने समरसता के मनुस्मृति राजकाज के बावजूद आत्महत्या कर ली है।

गौरतलब है कि ये आंकड़े नोटबंदी से पहले के हैं।नोटबंदी से कृषि संकट गहरा जाने से और पैदावर में असर के नतीजे आने अभी बाकी हैं।बहरहाल यह मानने की वजह अभी कोई नहीं है कि नोटबंदी से किसानों की हालत में कोई सुधार हुआ है।डिजिटल इंडिया में गुजर बसर करने के लिए जाहिर है कि इस वर्ग के पास क्रयशक्ति नहीं है और समाजिक योजनाओं और सरकारी खर्च के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं है।जनसंख्या के हिसाब से इनमें कमसेकम नब्वे फीसद लोग हिंदू है और हिंदुत्व के एजंडे में ऐसे सर्वहारा तबके के अछूत पिछड़े आदिवासी हिंदुओं के लिए मनुस्मृति विधान के तहत कोई जगह नहीं है।गौरतलब है कि एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक करीब 39 प्रतिशत किसानों ने दीवालिया होने, कर्ज के बोझ तले दबे होने या कृषि संबंधी मसलों की वजह से मौत को गले लगाया है, 20 प्रतिशत कृषि श्रमिकों की आत्महत्या की भी यही वजह रही है। किसानों की आत्महत्या में छोटे व सीमांत किसानों की आत्महत्या का प्रतिशत करीब 73 रहा है। इस श्रेणी में वे किसान आते हैं, जिनके पास एक हेक्टेयर (एक हेक्टेयर 10,000 वर्गमीटर के बराबर होता है) से कम जमीन है। 2014 में भी करीब 73 प्रतिशत छोटे व सीमांत किसानों ने आत्महत्या की थी।

डिजिटल कैशलैस इंडिया में आटोमेशन के आधार अंधियारे में बेरोजगारी जिस घने कुहासे की तरह देश का प्रयावरण बनता जा रहा है और देश विदेश में नौकरियों से जिस पैमाने पर छंटनी हो रही है और उस तुलना में रोजगार सृजन की कोई परिकल्पना नहीं है,तो किसानों और खेतिहर मजदूरों की दुनिया में पढ़े लिखे लोगों के लिए रोजगार का अभूतपूर्व संकटभी गहरा रहा है,जिसके दबाव में कृषि आजीविका से जुड़े समुदायों, समाज और परिवारों के लिए आजीविका और रोजगार के सारे विकल्प खत्म हो जाने से खेतों पर दबाव और उसीतरह बढ़ेगा जैसा हमने अस्सी के दशक में पंजाब जैसे समृद्ध राज्य में देखा है जिससे निपटने की कोई तैयारी दीख नहीं रही है।

बहरहाल इस रपट में पश्चिम बंगाल समेत सात राज्यों में एक भी किसान आत्महत्या का मामला दर्ज दिखाया नहीं गया है।गौरतलब है कि राज्यों ने अपने पुलिस रिकार्ड के आधार पर एनसीआरबी को तथ्य दिये हैं।

इसका सीधा मतलब यह हुआ कि जिन राज्यों में किसानों की आत्महत्या का मामला दर्ज ही नहीं हुआ हैं,उनके आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

बंगाल के किसान संगठन यह मानने के लिए कतई तैयार नहीं है कि बंगाल में किसी किसान ने आत्महत्या नहीं की है और 2014 -15 में बंगाल में भी किसानों की आत्महत्या सुर्खियां बनती रही है। वे वारदातें जाहिर है कि पुलिस रिकार्ड में न होने के कारण इस रपट में भी नहीं है।

इसी तरह उत्तर प्रदेश योजना आयोग के सदस्य सुधीर पंवार ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'किसानों की आत्महत्या के ये आंकड़े हकीकत बयान नहीं करते, क्योंकि बड़े पैमाने में आत्महत्याओं को दर्ज ही नहीं किया जाता है। इसकी कोई सटीक वजह नहीं है। हां, इससे साफ साफ पता चलता है कि गांवों में आर्थिक तनाव पिछले कुछ साल के दौरान बढ़ा है, जिसकी प्रमुख वजह लगातार दो साल पड़ा सूखा और कृषि उत्पादों का उचित मूल्य न मिलना है।'

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल, मिजोरम, नागालैंड और गोवा उन राज्यों में शामिल हैं जहां किसान आत्महत्या का एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया।

अभी हालत यह है कि हर रोज देश में औसतन 35 किसान खुदकशी करते हैं।इस मामले में भगवा राज्य महाराष्ट्र सबसे आगे है।जहां किसान सबसे ज्यादा आत्महत्या करते हैं।2015 में महाराष्ट्र में 3.30 किसानों ने आत्महत्या की है।

खेतिहर मजदूरों की आत्महत्या के मामले में भी महाराष्ट्र सबसे आगे है,जहां 1261 लोगों ने आत्महत्या की।इसके बाद तेलंगाना में 1,358 और कर्नाटक में 1,197 किसानों ने खुदकुशी की।

छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में भी 854 किसानों ने जिंदगी के बदले मौत को चुना। मध्यप्रदेश और आंध्र प्रदेश से भी कई किसानों ने आत्महत्या का रास्ता चुना।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभालने के बाद से लगातार वायदा किया है कि किसानों की आमदनी दो गुणी हो जायेगी।इसके अलावा विभिन्न सरकारी एजंसियों में कृषि विकास दर में उछाला का दावा किया जाता रहा है।

खास बात यह कि इस अवधि में किसानों की आत्महत्या की घटनाएं 5,650 से बढ़कर 8.007 हो गयी यानी किसानों की आत्महत्या दर में 42 प्रतिशत वृद्धि हो गयी है। इसके मुकाबले इसी अवधि में खेतिहर मजदूरों की आत्महत्या की घटनाएं 6,710 से घटकर 4,595 हो गयी है।फिर भी इस रपट के मुताबिक खेतिहर मजदूरों की आत्महत्या की घटनाओं में भी 31 प्रतिशत वृद्धि हुई है।

खेती के लिए कर्ज लेकर चुका न पाने की वजह से सबसे ज्यादा आत्महत्याएं हुई हैं। 38.7 प्रतिशत किसानों ने कर्ज के बोझ के चलते आत्महत्या कर ली है।19.5 प्रतिशत किसानों ने दूसरी वजहों से खुदकशी की है।

किसानों की आत्महत्या का विश्लेषण करते हुए एनसीआरबी रपट में आत्महत्या के कारणों का ब्यौरा दिया गया है। रिपोर्ट में किसानों की आत्महत्या के लिए बैंकों और माइक्रो फाइनेंस को जिम्मेदार माना गया हैं।

देशभर में 3000 से अधिक किसानों, लगभग 80 फीसदी ने कर्ज की वजह से आत्महत्या की। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक यही माना जाता था कि किसान महाजनों से लिए कर्ज और उनके उत्पीड़न के चलते आत्महत्या करता है। कृषि संबंधित मामले जैसे फसलों की उपज में कमी भी आत्महत्या के लिए जिम्मेदार कारक के रूप में सामने आया है।

रपट के अनुसार खेती करने वाले मजदूरों में आत्महत्या के लिए बीमारी और पारिवारिक समस्या भी प्रमुख कारण के रूप में सामने आये हैं।

एनसीआरबी ने कहा, 'पिछले 2-3 साल में असमान व अपर्याप्त मॉनसूनी बारिश की वजह से कृषि क्षेत्र में लगे लोगोंं की समस्याएं बढ़ी हैं। किसानों के  इस तरह के अप्रत्याशित कदम उठाने के पीछे यह एक बड़ी वजह है।' इस सूची के राज्योंं में एक बार फिर महाराष्ट्र पहले स्थान पर रहा है, जहां 2015 में कृषि क्षेत्र में लगे लोगों ने सबसे ज्यादा 4,291 आत्महत्याएं की हैं। इसके बाद कर्नाटक (1,559), तेलंगाना (1,400), मध्य प्रदेश (1,290), छत्तीसगढ़ (954) और आंध्र प्रदेश (916) का स्थान है।



Thursday, May 4, 2017

आधार से नागरिकों की जान माल को बारी खतरा।तेरह करोड़ नागरिकों की जानकारी लीक। सबकुछ राष्ट्र के नियंत्रण में होने के बजाय सबकुछ राष्ट्र के नियंत्रण से बाहर निजी, कारपोरेट पूंजी, प्रोमोटरों ,बिल्डरों, माफिया और आपराधिक तत्वों के नियंत्रण में होता जा रहा है ,जिससे नागरिक और राष्ट्र दोनों संकट में हैं,हालांकि निरंकुश सत्ता और सत्ता वर्ग को कोई खतरा नहीं है,कोई चुनौती भी नहीं है। पलाश

आधार से नागरिकों की जान माल को बारी खतरा।तेरह करोड़ नागरिकों की जानकारी लीक।

सबकुछ राष्ट्र के नियंत्रण में होने के बजाय सबकुछ राष्ट्र के नियंत्रण से बाहर निजी, कारपोरेट पूंजी, प्रोमोटरों ,बिल्डरों, माफिया और आपराधिक तत्वों के नियंत्रण में होता जा रहा है ,जिससे नागरिक और राष्ट्र दोनों संकट में हैं,हालांकि निरंकुश सत्ता और सत्ता वर्ग को कोई खतरा नहीं है,कोई चुनौती भी नहीं है।

पलाश विश्वास

वीडियोःhttps://www.facebook.com/palashbiswaskl/videos/1704342366260832/?l=921188677485420886

तेरह लाख आधार कार्ड की जानकारी लीक हो गयी है और सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार ने यह मान लिया है।भारत सरकार के मुताबिक आदार प्राधिकरण के पोर्टल से यह लीक नहीं हुई है।गौरतलब है कि भारत में आधार परियोजना बिना संसदीय अनुमति के मनमोहनसिंह के प्रधानमंत्रित्वकाल में शुरु हुआ जिसके लिए कोई कानून भी तब बनाया नहीं गया जो संघी कार्यकाल में बना लिया गया है।

तबसे लेकर आधार कार्ड बनाने का काम निजी  और कारपोरेट कंपनियों ने किया है।अनिवार्य सेवाओं से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना करके आधार नंबर लागू कर दिये जाने से राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों ने भी अफरातफरी में व्यापक पैमाने पर जो आधार कार्ड बनवाये, वे भी सरकारी एजंसियों के बजाये ठेके की एजंसियों से बनवाये गये हैं,जिसमें सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं हुआ है।

सरकार जब तेरह करोड़लीक होने की बात सुप्रीम कोर्ट में मान रही है तो निजी कंपनियों और एजंसियों की तरफसे बनायेआधार कार्ट और निजी कंपनियों की ओर से तैयार किये गये स्मार्ट आधार कार्ड से किस हद तक लीक हो गयी है,आदार के जरिये डिजिटल लेनदेन चालू हो जाने पर भुक्तभोगी ही इस महसूस कर सकेंगे और फिलहाल राजनीतिक दलों,राजनेताओं,मीडिया,बुद्धिजीनवियों और भारत की धर्मोन्मादी बहुसंख्य आम जनता को नागरिकों की जान माल को इस अभूतपूर्व खतरे से कोई फर्क नहीं पड़ा है क्योंकि उपभोक्ता बाजार और उपभोक्ता संस्कृति के अभूतपूर्व विकास के दौर में स्वतंत्रता और संप्रभुता कोई मुद्दा बन नहीं सकता।

अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक कोई भी व्यक्ति नागरिकता से वंचित नहीं किया जा सकता है और न नागरिक मानवाधिकार से। आधार नंबर अनिवार्य बना दिये जाने पर नागरिकता,नागरिक और मानवाधिकार से भी आधार नंबर न होने की स्थिति में मनुष्य वंचित है।यानि नागरिक सिर्फ आधार नंबर है।

आधार नंबर न हुआ किसी नागरिक का कोई वजूद ही नहीं है। उसके कोई नागरिक, संवैधानिक, मौलिक या मानवाधिकार नहीं हैं। वह किसी बुनियादी सुविधाओं का हकदार नहीं है और न उसे रोटी रोजी का कोई हक है।

फिर यह नंबर हुआ तो नागरिकों की कोई गोपनीयता नहीं है। संप्रभुता नहीं है।स्वतंत्रता नहीं है।उसकी तमाम गतिविधियों की पल पल निगरानी है।

भारत में अब नागरिकों के सपनों,आकांक्षाओं,विचारों,मतामत,विवेक और जीवन यापन सबकुछ नियंत्रित है।यह नियंत्रण राष्ट्र का जितना है,उससे कही ज्यादा आपराधिक तत्वों और निजी कारपोरेट देशी विदेशी कंपनियों का है जबकि आदार योजना का असल मकसद राष्ट्र और जनता के संसाधनों की खुली लूट है,जल जंगल जमीन,आजीविका और रोजगार से अनंत बेदखली है।

इसके विपरीत भारत सरकार का मानना है कि नागरिकों की निजी बायोमेट्रिक तथ्यों पर उनका कोई अधिकार नहीं है और न ही उनका अपने शरीर,अपनी निजता और गोपनीयता का कोई अधिकार है।विभिन्न कानूनों का हवाला देते हुए भारत सरकार नें सुप्रीम कोर्ट में यह दलील दी है।

इस बयान के बाद बी भारत की संसदीय राजनीति में कोई हलचल प्रतिक्रिया नहीं है तो समझ लीजिये कि राजनीति किस तरह आम जनता के खिलाफ है।घौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में आधार का बचाव करते हुए भारत सरकार के अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने मंगलवार को कहा कि किसी भी व्यक्ति का अपने शरीर पर मुकम्मल अधिकार नहीं है।

इसके संदर्भ में गौरतलब है कि बेंगलुरू के सेंटर फॉर इंटरनेट एंड सोसायटी ने 13.5 करोड़ आधार कार्ड का डाटा लीक होने की आशंका जाहिर की है।

इसका उल्लेख करते हुए संघ सरकार के घटक  शिवसेना के मुखपत्र  सामना में लिखा गया है कि यदि संस्था का दावा सच है तो यह एक गंभीर मामला है। 'मजे की बात है विपक्षा के खेमे में सिरे से सन्नाटा है।

सामना के संपादकीय में आगे लिखा है, 'आजकल सरकारी अनुदान, बैंक खाता, डाक व्यवहार के साथ ही अन्य कई जगहों पर आधार कार्ड के लीक होने का मतलब महत्वपूर्ण गोपनीय जानकारी लीक होना है। ऐसा होता रहा तो इसकी सुरक्षा के दावे पर प्रश्नचिन्ह लग जाएगा।'

आधार की सुरक्षा पर बात करते हुए इसमें आगे लिखा है, 'सच तो यह है कि जिस सरकारी वेबसाइट से यह डेटा लीक हुआ है, उन विभागों को केंद्र सरकार ने सूचना दी थी। तीन विभागों ने अपनी गलतियां दूर तो कीं लेकिन जानकारियां लीक होने का खतरा बना हुआ है। इसका खामियाजा लाखों लोगों को उठाना पड़ रहा है। इसका विचार कौन करेगा?'

इस सिलसिले में गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में यह स्वीकार किया कि आधार कार्ड धारकों का डाटा लीक हुआ है। हालांकि सरकार ने कहा कि यह लीक भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूएडीएआई) की ओर से नहीं हुआ है। साथ ही सरकार ने कहा कि जो लोग जानबूझकर आधार नहीं बनवा रहे हैं वे वास्तव में एक तरह से अपराध कर रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने न्यायमूर्ति एके सिकरी की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि कुछ सरकारी विभागों से आधार कार्ड धारकों का डाटा लीक हुआ है। ऐसा संभवत: पारदर्शिता बनाने के क्रम में हुआ होगा।

गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि ऐसी न्यूज आई है कि आधार का डेटा लीक हुआ है? इस पर केंद्र की ओर से बताया गया कि डेटा यूआईडीएआई से लीक नहीं हुआ है। दूसरे सरकारी डिपार्टमेंट से आधार कार्ड का डेटा लीक हुआ होगा। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने दलील दी कि आधार का डेटा पूरी तरह से सेफ है। इसे आईटी एक्ट के तहत क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर की श्रेणी में रखा गया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि आधार के लिए बनाया गया मेन एक्ट कहता है कि आधार स्वैच्छिक है, लेकिन वहीं सरकार इसे अनिवार्य कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार पहले जहां से आधार कार्ड का डेटा लीक हुआ, उसमें दो डेटा बेस रूरल डिवेलपमेंट मिनिस्ट्री से जुड़े हैं। इनमें नैशनल सोशल असिस्टेंट प्रोग्राम का डैशबोर्ड और नैशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी ऐक्ट का पोर्टल शामिल है। दो डेटा बेस आंध्र प्रदेश से जुड़े हैं। इनमें एक स्टेट का नरेगा पोर्टल और चंद्राना बीमा नामक सरकारी स्कीम का डैशबोर्ड है। इन पर लाखों लोगों की आधार डीटेल दी गई है, जिसे कोई भी देख सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चार पोर्टल्स से लीक हुए आधार नंबर 13 से 13.5 करोड़ के बीच हो सकते हैं। इसमें अकाउंट नंबर्स 10 करोड़ के आसपास हो सकते हैं।

सीएनबीसी-आवाज़खुलासा कर दिया है कि   कैसे केंद्र से जुड़े संस्थान आधार पर अपराध किए जा रहे हैं। दरअसल केंद्रीय विद्यालयों और कुछ शिक्षण संस्थानों ने बच्चों के आधार नंबर सार्वजनिक कर दिए हैं। सरकारी स्कूल कर रहे बच्चों की निजता से खिलवाड़ किया जा रहा है। कई केन्द्रीय विद्यालयों की साइट पर बच्चों के आधार नंबर देखे जा सकते हैं। कई और संस्थानों ने भी बच्चों के आधार नंबर सार्वजनिक कर दिए हैं। बच्चों की जन्मतिथि, फोन नंबर और बाकी जानकारियां भी ऑनलाइन देखी जा सकती हैं। महज एक गूगल सर्च से ये सारी जानकारी हासिल की जा सकती है। बता दें कि आधार एक्ट में जानकारी पब्लिक करना गैरकानूनी है।

इसी सिलसिले में अंग्रेजी मीडिया फर्स्ट पोस्ट की इस खबर पर तनिक गौर करेंछ

Aadhaar debate: Govt putting billions at risk by claiming they don't have 'absolute right' over their bodies

Attorney General of India Mukul Rohatgi informed the Supreme Court on Wednesday that Indian citizens cannot claim an "absolute right" over their biometric data and refuse to apply for Aadhaar cards. To support this contention, Rohatgi referred to various laws, such as breathalyser tests, finger printing during property registration, medical termination of pregnancy, and also laws that prohibit the commission of suicide as pointing to the fact that there exists no absolute right over one's body under the Constitution.

This comes at a time while the apex court is hearing arguments challenging the validity of Section 139AA of the Income Tax Act, 1961, that makes it mandatory to link Permanent Account Number (PAN) with Aadhaar. In an earlier hearing on the validity of the UID programme in 2015, the attorney general had informed the court that the question of privacy being a fundamental right under the Constitution needs to be revised, as there seemed to be conflicting judgments on this issue.

यह सरासर नागरिक ,मानवाधिकारों के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय कानून का भी खुल्ला उल्लंघन है। इस पर तुर्रा यह कि नागरिकों से उनकी आजादी छीनने के इस कारपोरेट उपक्रम क खिलाफ सारे के सारे संसदीय राजनीतिक दल और राजनेता खामोश हैं।


नतीजतन करीब तेरह करोड़ नागरिकों क आधार और बैंक खातों के तथ्य लीक हुए हैं और क्रेडिट डिबिट एटीएम कार्ड की तरह आधार कार्ड भी डुप्लिकेट बन रहे हैं, उसकी व्यापक पैमाने पर क्लोनिंग हो रही है।अर्थात राष्ट्र के निरंकुश नियंत्रण के बजाय वित्तीय गतिविधियों पर आपराधित तत्वों का नियंत्रण हो गया है।

आधार प्रादिकरण से विभिन्न कारपोरेट कंपनियों के नागरिकों के निजी तथ्यों के लेनदेन के समझौते भी हुए हैं।अभी आपको मेल या फोन पर विभिन्न कंपनियों की ओर से उनकी सेवाएं खरीदने के लिए जो संदेश मिलते हैं,उसके लिए उन्हें सारी जानकारी आपके आधार नंबर से मिलती है।

धड़ल्ले से ऐसा संदेश भेजने वालों को न सिर्फ आपकी क्रय क्षमता बल्कि आपके बैंक खातों के बारे में भी जानकारी रहती है और आपको बड़े लोन और दूसरी वित्तीय सुविधाओं का प्रस्ताव भी उसी आधार पर मिलता है।

इससे उपभोक्ता बाजार और ई बिजनेस,डिजिटल लेनदेन बहुत तेजी से बड़ा है लेकिन इन पर न भारत सरकार और न रिजर्व बैंक का कोई नियंत्रण है जो आगे चलकर भारी आर्तिक अराजकता पैदा कर सकती है और इसमें समूची बैंकिंग प्रमाली ही ध्वस्त हो सकती है।

आपराधिक तत्वों के हाथों में निजी कंपनियों की ओर से बनाये गये और ठेके पर गैरसरकारी एजंसियों से बनाये गये आधार कार्ड के जरिये व्यापक पैमाने पर नागरिकों के गोपनीय  तथ्य आ गये हैं।यह कानून और व्यवस्था के लिए बी बड़ी चुनौती है।

सबसे खतरनाक बात यह है कि आधार नंबर मोबाइल नंबर के लिए मोबाइल कनेक्शन की दुकानों के हवाले बी करना अनिवार्य हो गया है।हर जरुरी सेवाओं के निजीकरण कारपोरेटीकरण की स्थिति में आधार नंबर के जरिये नागरिकों की सारी जरुरी जनाकारियां अजनबी और आपरराधिक तत्वों के हवाले हो रही है जो किसी भी तौर पर राष्ट्र या सरकार का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

जब बैंकों के एटीएम डेबिट क्रेडिट कार्ड धड़ल्ले से पिन लीक हो जाने से रद्द किये जा रहे थे,तब भी कोलकाता और मुंबई में बड़े बैंक अधिकारियों और आम बैंक कर्मचारियों से हामारी इस बारे में बात होती रही है।

उन सभी का कहना है कि चेकबुक से लेकर कार्ड और खातों को लेकर बैंकों का सुरक्षा इंतजाम बहुत पुख्ता है।

तब हमने पैनकार्ड और बैंक खातों से आधार नंबर जोड़ने का हवाला देकर पूछा था कि आधार नंबर से तो सारी जानकारियां लीक हो रही हैं और आधार लिंक के जरिये तथ्यों चुराये जाने पर बैंक खातों,कार्डों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर सकता है।

उनके पास इसका कोई जबाव नहीं था।

गौरतलब है कि पिन चुराये जाने के मामले में जांच का नतीजा अभी तक नहीं आया है और इसी बीच आधार के जरिये नये सिरे से बैंको के खातों की जानकारियां लीक हो जाने की खबर आ गयी है।

Divan said that there are already over 1,69,000 duplicate Aadhaars in the country.

Aadhaar data of 130 millions, bank account details leaked from govt websites: Report

Indian Express reports.

India Today reports:

Just how leaky is the Aadhaar data? A lot, says a study published by Centre for Internet and Society, a Bengaluru-based organisation (CIS). In a study published on May 1, two researchers from CIS found that data of over 130 million Aadhaar card holders has been leaked from just four government websites. As scary as this is, there is more to it. Not only the Aadhaar numbers, names and other personal details of millions of people have been leaked but also their bank account numbers.

The CIS report noted that the leak is from four portals that deal with National Social Assistance Programme, National Rural Employment Guarantee Scheme, Chandranna Bima Scheme and Daily Online Payment Reports of NREGA.

सबसे खतरनाक बात यह है कि अब भारत सरकार डिजिटल लेन देन आधार नंबर के जरिये चालू करने जा रही है।बार बार आधार नंबर से लेनदेन की स्थिति में अब तक हुए फर्जीवाड़े के मद्देनजर नागरिकों की जान माल को भारी खतरे का अंदेशा है।

गौरतलब है कि साइबार क्राइम या फर्जीवाड़े से बैंको के खातों से चुराये जाने वाले रकम के लिए बैंक कोई मुआवजा नहीं दे रहा है।

प्लेटिनम कार्ट पर अधिकतम डेढ़ लाख रुपये के मुआवजे का प्रावधान है।जबकि आर्थिक लेन देन बैंकिंग के दायरे से बाहर चली जा रहीं है।

जब आधार योजना की पहले पहले चर्चा चली थी, नागरिकता संशोधन कानून के तुरंत बाद और श्रम कानून कर सुधार कानूनों के आर्थिक सुधार लागू होने से पहले, तभी से हम इस बारे में लगातार लिखते बोलते रहे हैं।

डिजिटल इंडिया में उदारीकरण, निजीकरण और ग्लोबीकरण के तहत आटोमेशन के लिए आधार योजना सबसे कारगर हथियार है।

कारपोरेट दुनिया में नागरिकों के कोई अधिकार नहीं होते।

कारपोरेट दुनिया में मानवाधिकार भी नहीं होते।

मुक्तबाजार में विकास और वृद्धि दोनों का मतलब उपभोक्ता बाजार का विस्तार है।विकास और वृद्धि दोनों सत्ता के जाति वर्ग वर्चस्व के एकाधिकार को बहाल करने का इंतजाम है।

अंध राष्ट्रवाद की अस्मिता राजनीति में खंडित भारतीयता और देशभक्ति के भक्तों के लिए नागरिकों की स्वतंत्रता ,संप्रभुता,निजता औ र गोपनीयता को कोई मतलब नहीं है।वे लोग हर क्षेत्र में राष्ट्र का नियंत्रण के पक्ष में हैं।

वंचित उत्पीड़ित जनसमुदायों अल्पसंख्यकों,आदिवासियों,दलितों,पिछड़ों और स्त्रियों के प्रति जाहिर सी बात है कि इन भक्तों की किसी किस्म की सहानुभूति नहीं है।वे राष्ट्र और सत्ता में कोई फर्क भी नहीं समझते और सत्ता को ही राष्ट्र मानकर चलते हुए निरंकुश सत्ता के साथ निरंकुश सैन्य राष्ट्र के पक्ष में धर्मोन्मादी बहुसंख्यक सुनामी है जिसका फिलहाल कोई राजनैतिक या वैचारिक विकल्प नहीं दीख रही है।

दिक्कत यह है कि सबकुछ राष्ट्र के नियंत्रण में होने के बजाय सबकुछ राष्ट्र के नियंत्रण से बाहर निजी,कारपोरेट पूंजी,प्रोमोटरों ,बिल्डरों,माफिया और आपराधिक तत्वों के नियंत्रण में होता जा रहा है ,जिससे नागरिक और राष्ट्र दोनों संकट में हैं,हालांकि निरंकुश सत्ता और सत्ता वर्ग को कोई खतरा नहीं है,कोई चुनौती भी नहीं है।

हमारे मित्र मशहूर पत्रकार उर्मिलेश ने लिखा हैः

'आधार' निराधार नहीं है। इसके पीछे राज्य के लगातार निरंकुश होते जाने और नागरिकों के बुनियादी अधिकारों(यहां तक कि आपका अपने शरीर पर भी अधिकार नहीं है: भारत के अटार्नी जनरल के मुताबिक) के छिनते जाने की पूरी दास्तान है। पर जनता इसके विरोध में सड़कों पर नहीं उतर रही है क्योंकि 'आधार' के नाम पर राज्य कथित सुविधाओं का झुनझुना जो बजा रहा है! क्या राज्य की तरफ से कोई भी उच्चाधिकारी बता सकता है कि 'आधार' से कौन-कौन सी नयी सुविधाएं नागरिक को मिली, जो इसके न रहने पर नहीं मिल सकती थीं? 'आधार' संवैधानिक लोकतंत्र में निरंकुशता की अवैध संतान है, जिसका प्रसव यूपीए काल में हुआ और अब उसे शैतान बनाने का काम एनडीए सरकार कर रही है!



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Wednesday, May 3, 2017

महत्वपूर्ण खबरें और आलेख जनविद्रोह के कगार पर कश्मीर : दो सांप्रदायिकताएं मिलकर तो दुहरी सांप्रदायिकता ही बना सकती हैं, धर्मनिरपेक्षता नहीं

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जनविद्रोह के कगार पर कश्मीर  दो सांप्रदायिकताएं मिलकर तो दुहरी सांप्रदायिकता ही बना सकती हैं धर्मनिरपेक्षता नहीं
जनविद्रोह के कगार पर कश्मीर : दो सांप्रदायिकताएं मिलकर तो दुहरी सांप्रदायिकता ही बना सकती हैं, धर्मनिरपेक्षता नहीं

महबूबा मुफ्ती की स्थिति अगर एक साथ त्रासद और हास्यास्पद हो गयी है, तो इसके लिए शायद वह खुद ही सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं।

राजेंद्र शर्मा
2017-05-03 22:39:43
और नदियों की तरह नर्मदा भी आईसीयू में
और नदियों की तरह नर्मदा भी आईसीयू में

राज्य सरकार ने नर्मदा बचाओ अभियान में खुद को गंभीर दिखाने को नर्मदा को मानव जाति में शामिल कर लिया है ताकि उसे ICU में भर्ती कर करोड़ों अरबों का व...

राजीव मित्तल
2017-05-03 15:45:18
आदिवासियों की चिंता क्यों है तुम्हें
आदिवासियों की चिंता क्यों है तुम्हें?

मिटटी में मिलाना चाहते हो तुम आदिवासियत को उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने के नाम पर बलात्कार करना चाहते हो तुम आदिवासी महिलाओं का ...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-05-02 18:54:52
निजी स्कूल की लूट पर रवीश कुमार को मोदी का खुला पत्र
निजी स्कूल की लूट पर रवीश कुमार को मोदी का खुला पत्र

निज़ी स्कूल लूट करते हैं; क्योंकि: हमने यह ग्रहित धर लिया है कि सरकारी स्कूल – जहाँ कभी देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से लेकर बड़े-बड़े वैज्ञानि...

अतिथि लेखक
2017-05-02 18:41:20
ईवीएम पर अविश्वास दोराहे पर लोकतंत्र
ईवीएम पर अविश्वास, दोराहे पर लोकतंत्र

अब राष्ट्रीय स्तर पर कोई चुनावी दल पनप नहीं सकता। देशद्रोह, गौहत्या, आतंकवाद, ईशनिन्दा, भ्रष्टाचार, आदि किसी भी बहाने से बदनाम कर मारा जा सकता है...

वीरेन्द्र जैन
2017-05-02 13:54:39
बाबरी मस्जिद केस  मुसलमानों की खामोशी क्या कहती है कटघरे में आडवाणी ही नहीं न्यायपालिका भी है
बाबरी मस्जिद केस : मुसलमानों की खामोशी क्या कहती है? कटघरे में आडवाणी ही नहीं न्यायपालिका भी है

सुप्रीम कोर्ट बाबरी मस्जिद ध्वंस के अपराधियों को सजा देने में सचमुच गम्भीर है तब भी मुसलमान यकीन नहीं कर पाएगा। उसके लिए अब सिर्फ आडवाणी ही कटघरे



समाचार > देश
शिवपाल ने अखिलेश को दिए तीन महीने रामगोपाल को दी नसीहत गीता पढ़ो शकुनि
शिवपाल ने अखिलेश को दिए तीन महीने, रामगोपाल को दी नसीहत, गीता पढ़ो शकुनि

शिवपाल सिंह यादव ने इशारों-इशारों में ऐलान कर दिया कि अगर अखिलेश नहीं माने तो समाजवादी पार्टी में दो फाड़ हो जाएंगे।

हस्तक्षेप डेस्क
2017-05-03 22:19:40
पाकिस्तानी कैदियों के मामले की सुनवाई 21 जुलाई तक स्थगित सरकार को स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का दिया सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश
पाकिस्तानी कैदियों के मामले की सुनवाई 21 जुलाई तक स्थगित, सरकार को स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का दिया सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश

याचिका सं. 310/2005 में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि इन कैदियों की रिहाई के लिए हस्तक्षेप करे, जिन्होंने अपनी सजाएं पूरी ली हैं या काफी...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-05-03 22:06:26
विश्वास के साथ केजरीवाल सिसोदिया भी आरएसएस से मिले हुए हैं - माकन
विश्वास के साथ केजरीवाल, सिसोदिया भी आरएसएस से मिले हुए हैं - माकन

माकन ने कहा कि न सिर्फ कुमार विश्वास बल्कि अरविन्द केजरीवाल तथा मनीष सिसोदिया की भाजपा से भी सांठगांठ है। उन्होंने कहा कि आप कांग्रेस के वोट काटक...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-05-03 21:54:50
रार थमी लेकिन दोफाड़ हुई आम आदमी पार्टी
रार थमी लेकिन दोफाड़ हुई आम आदमी पार्टी...

आम आदमी पार्टी ने अमानतउल्लाह की प्राथमिक सदस्यता भी रद्द कर दी है और उनके कुमार विश्वास के खिलाफ दिए गए बयान की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-05-03 21:40:32
एकमात्र तैरती झील लोकटक
एकमात्र तैरती झील लोकटक

नमी, जलजीव, वनस्पति और पारस्थितिकी की दृष्टि से लोकटक काफी धनी झील मानी गई है। जहां तैरती हुई फूमदी पर जहां कई तरह की घास, नरकुल तथा अन्य पौधे मौ...

अरुण तिवारी
2017-05-03 13:12:33
काबुल में आत्मघाती विस्फोट कई हताहत
काबुल में आत्मघाती विस्फोट, कई हताहत

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में बुधवार को आत्मघाती विस्फोट हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गठबंधन बलों के सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाकर हमल...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-05-03 10:05:26
कश्मीर  पुलिस चौकी पर हमला आतंकवादियों ने पुलिसकर्मियों से छीनीं पाँच राइफल
कश्मीर : पुलिस चौकी पर हमला, आतंकवादियों ने पुलिसकर्मियों से छीनीं पाँच राइफल

दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में आतंकवादियोंने एक पुलिस चौकी पर हमला कर दिया। आतंकवादी वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों से पांच सर्विस राइफल लेकर फरार...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-05-03 09:20:30
भीमसिंह की प्रधानमंत्री से जम्मू-कश्मीर में उगलते लावा को बुझाने के लिए राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक बुलाने की अपील
भीमसिंह की प्रधानमंत्री से जम्मू-कश्मीर में उगलते लावा को बुझाने के लिए राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक बुलाने की अपील

प्रो. भीमसिंह ने प्रमं नरेन्द्र मोदी से अनुरोध किया है कि वे जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व के हालात को शांत रखने के लिए तमाम राजनीतिक दलों के प्रति...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-05-02 22:12:32
सिब्बल ने पूछा क्या स्मृति ईरानी अब मोदी को भेजेंगी चूड़ियां
सिब्बल ने पूछा, क्या स्मृति ईरानी अब मोदी को भेजेंगी चूड़ियां?

कपिल सिब्बल ने पूछा है कि क्या स्मृति ईरानी अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चूड़ियां भेजेंगी, क्योंकि साल 2013 में इसी तरह की घटना के बाद वह तत्क...



Opinion > Debate
how to achieve low agriculture npas  lessons from gujarat
How to Achieve Low Agriculture NPAs : Lessons from Gujarat

Who gains, who loses? Where does the money come from, where does it go? Trickle down? Gush up? Do the math.  

अतिथि लेखक
2017-05-03 13:28:30
rising right wing and left ideology
Rising Right Wing and Left Ideology

"Grab 'em by the pussy": how Trump talked about women in private is horrifying." Now he is American President!

Gp Capt KK Singh
2017-05-03 12:50:04
why and how
Why and How "Secularism" in Our Constitution

Any discussion on secularism would need first to focus on two basic aspects: Firstly, the word 'secularism' has no substitute in any of our langu...

अतिथि लेखक
2017-05-02 11:18:03
sonia is therefore a foreigner while the mughals were indians
Sonia is therefore a foreigner, while the Mughals were Indians

The Mughals, though initially foreigners, later became Indianized, India prospered under Mughal rule, and the Mughals never took away wealth from...

Justice Markandey Katju
2017-04-29 19:21:53
sweeping of country by hindutva – what to be done
Sweeping of Country by Hindutva – What to be done?

Hindutva is sweeping the country. It also shows that secularism has not taken roots in our country. The Hindutva elements are gradually sweeping ...


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