Saturday, April 9, 2016

दूसरे चरण के मतदान में फिर वही भूतों का नाच जारी रहने का अंदेशा क्योंकि शिकायत दर्ज कराने में वाम कांग्रेस गठबंधनन ने कर दी देरी प्रधानमंत्री को औकात भी बताने लगीं मुख्यमंत्री,लोकतंत्र का नजारा यह भी। दीदी ने भाजपा को भयानक जाली पार्टी भी कहा। एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास हस्तक्षेप


दूसरे चरण के मतदान में फिर वही भूतों का नाच जारी रहने का अंदेशा

क्योंकि शिकायत दर्ज कराने में वाम कांग्रेस गठबंधनन ने कर दी देरी

प्रधानमंत्री को औकात भी बताने लगीं मुख्यमंत्री,लोकतंत्र का नजारा यह भी।

दीदी ने भाजपा को भयानक जाली पार्टी भी कहा।

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

हस्तक्षेप

दूसरे चरण के मतदान में फिर वही भूतों का नाच जारी रहने का अंदेशा है क्योंकि शिकायत दर्ज कराने में वाम कांग्रेस गठबंधन ने कर दी देरी कर दी है।चुनाव आयोग की भूमिका दीदी मोदी गठबंधन के बंदोबस्त के मुताबिक है।अफसरान धांधली के लिए तैनात कर दिये गये हैं और वे बेखौफ अपना काम कर रहे हैं।जबकि भूत बिरादरी दूसरे चरण में जिन 31 सीटों पर मतदान होने जा रहा है,वहां बेहद मजबूत है।गौरतलब है कि माकपा के राज्य सचिव डॉ सूर्यकांत मिश्रा ने मांग की है कि इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग जांच करे। मिश्रा ने कहा कि प्रथम चरण के मतदान के दौरान कई बूथों के अंदर राज्य पुलिसकर्मियों को देखा गया।


इसी बीच चिटपुट हिसां की वारदातों के जरिये दहशत का माहौल दमघोंटू बनता जा रहा है।वर्दमान के जिस मंगलकोट में तत्कालीम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सत्तादलके हमले से जान बचाकर धोती उठाये जान बचाने के लिए भागते नजर आये थे, वहां फिर तृणमूली और माकपाई समर्थक भिड़ गये।


वहां आकतुल गांव में शुक्रवार की रात हुई हिसां में आधा दर्जन लोग जख्मी हो गये हैं।ऐसे मंगलकोट बंगाल के कोने कोने में दहक रहे हैं और पुलिस प्रशासन कानून व्यवस्था को नियंत्रण करने के बजाय दीदी की जीत तय करने में लगा है और चुनाव आयोग और केंद्रीय वाहिनी सिर्फ तमाशबीन है।

अभी भूत बिरादरी के कारण एडवेंटेज ममता बनर्जी है।वाम कांग्रेस गठबंधन ने चुनाव आयोग से जंगल महल में दिनदहाड़े भूतों के नाच के बारे में शिकायत दर्ज कराने में काफी देर कर दी है,जबकि मतदान के दिन ही हस्तक्षेप ने मतदान में धांधली और जबरदस्ती का खुलासा कर दिया था और संशोधित मतदान आंकड़े जारी होते न होते रपट टांग दी थी।


अब इस देरी की वजह से कमसकम दूसरे चरण के मतदान में फिर वही भूतों का नाच जारी रहने का अंदेशा है।


गठबंधन के मुख्यमंत्री प्रत्याशी सूर्यकांत मिश्र और कांग्रेस के कमसकम दो बड़े नेता मानस भुइयां और ज्ञानसिंह सोहनपाल को हराने के लिए सत्ता गठजोड़ ने मोर्चाबंदी कर ली है।


11 अप्रैल को जंगल महल के ही पश्चिम मेदिनीपुर की तेरह,बांकुड़ा की 9 और बर्दवान की नौ सीटों पर मतदान होना है जहांपहले चरण की तरह धांधली रोकने का कोई पुख्ता इंतजाम न चुनाव आयोग का है और न वाम कांग्रेस गठबंधन का।


इन दो चरणों में हिसाब बराबार हो जाने का अंदेशा भी है लेकिन केंद्र सरकार के मातहत काम करने वाले चुनाव आयोग का रवैया तो समझ में आता है,वाम कांग्रेस गठबंधन की इस चूक का मतलब समझना मुश्किल है


इसी बीच बंगाल के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को चुनौती दी है कि उनकी हिम्मत है तो वे उन्हें गिरप्तार करके दिखा दें।


जाहिर है कि बंगाल के चुनाव प्रचार अभियान में प्रधानमतंत्री के एकतरफा आरोपों का जावब दिये बिना उनकी साख बचेगी नहीं और गुपचुप गठबंधन का खेल अब उतना छुपा नहीं है तो उन्हें यह चुनौती देनी ही थी।


यह कुल किस्सा गली मोहल्ले में या बस ट्रेन में आम नोंक झोंक का मामला है जिससे कुछ बनता बिगड़ता है नहीं।यह लोकतंत्र के गिरते हुए स्तर का नजारा है,जिसपर अफसोस होना चाहिए।


पहली बात तो यह है कि अगर सचमुच ममता बनर्जी के खिलाफ प्रधानमंत्री जो आरोप लगा रहे हैं,उनमें सच है तो केंद्र सरकार और केंद्रीय एजंसियों के पास उसके सबूत भी होंगे।ऐसे में बेहतर होता तो कि प्रधानमंत्री और उनकी सरकार इतने गंभीर आरोपों के मद्देनजर ममता बनर्जी के खिलाप प्रशासनकि स्तर पर कोई कार्रवाई करती।ऐसा न करके उन्होंने ममता बनर्जी को उनकी औकात बताने का मौका दिया है।


मोदी के ारोपों के जबाव में अपने चुनावी भाषण में  ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर करारे वार किये। उन्होंने भाजपा को 'भयानक जाली पार्टी' का नया नाम देते हुए प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधा और चुनौती दी है कि उनकी अगर औकात है तो वे उन्हें गिरप्तार करके दिखायें।

आसनसोल में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए दीदी ने कहा,'मैं सिर ऊंचा करके लड़ती हूं। अब तक किसी के सामने नहीं झुकी। प्रधानमंत्री अगर गिरफ्तार करना चाहते हैं तो कर सकते हैं, मुझे इसकी परवाह नहीं।

दीदी ने कहा कि भाजपा बड़ी बड़ी बातें करती है। बात करना आसान होता है पर लोगों के लिए काम करना कठिन। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा व प्रधानमंत्री जब भी यहां आए हैं ,मुझ पर आरोप लगाते हैं, पर मैं ऐसा नहीं करती हूं। विपक्ष में होते हुए मैं व्यक्तिगत रूप से न तो प्रधानमंत्री की आलोचना करूंगी और न ही बुद्धदेब भट्टाचार्य की।

प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी को अपने पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। उन्हें संघीय वयवस्था की उचित रूप से रक्षा करनी चाहिए।'


इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी के रेडियो शो 'मन की बात' का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि रेडियो पर केवल मोदी के मन की बात सुनना ऐसे लगता है कि मानो, वह कोई भगवान हैं।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा तृणमूल कांग्रेस पार्टी को टेरर, मौत और करप्शन कहे जाने के जवाब में बनर्जी ने भाजपा को भयानक जाली पार्टी का संबोधन किया।


दूसरी तरफ,वाम लोकतांत्रिक गठबंधन को लगता है कि चुनाव आसानी से जीत जाने की खुशफहमी हो गयी है।जबकि ऐसा कतई नहीं है।गठबंधन होने से जमीनी हालात रातोंरात बदल नहीं गये हैं।वैसे भी बंगाल में हर चुनाव क्षेत्र में सीधी मुकाबला होता है और हद से हद मुकाबला तिकोणा होता है।बाकी उम्मीदवारों को फालतू वोट नहीं मिलते।वोट बंटने का सवाल ही नहीं होता।वोटबैंक का गणित भी बहुत बदला नहीं है।


इसके बावजूद जैसे आज सुबह हस्तक्षेप पर शेष नारायण जी ने लिखा है,हालात ममता बनर्जी के खिलाफ है और हवा भी उन्हींके खिलाफ है।इस बरा सारे आरोप शारदा चिटफंड की तरह रफा दफा नहीं होंगे।क्योंकि जनता के समाने एक विकल्प है और वोटरों को साफ साफ लगता है कि ममता बनर्जी अपराजेय नहीं हैं।इसका मतलब यह नहीं है कि मुकाबला कहीं कांटे का नहीं है।


बहरहाल प्रथम चरण के तहत चार अप्रैल को 18 विधानसभा सीटों के लिए हुए मतदान के दौरान सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और चुनाव आयोग की भूमिका पर माकपा ने एक बार फिर सवाल उठाया है। माकपा के राज्य सचिव डॉ सूर्यकांत मिश्रा ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस ने वोट लूट का नया तरीका ढूंढ़ निकाला है।

माकपा का आरोप है कि कई केंद्रीय बल के जवानों का यूनिफार्म पहन कई सिविक वोलेंटियर मतदान के दौरान सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस कार्म करते देखे गये।


18 सीटों पर हुए मतदान के प्रतिशत में इजाफे को लेकर मिश्रा ने दावा किया कि पहले चरण के तहत हुए मतदान में तृणमूल का सूपड़ा साफ हो गया है। हालांकि शेष मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष हो, यह बात चुनाव आयोग सुनिश्चित करे। करोड़ों रुपये सारधा चिटफंड घोटाले और नारद स्टिंग ऑपरेशन का जिक्र करते हुए माकपा के राज्य सचिव डॉ सूर्यकांत मिश्रा ने आरोप लगाया है कि राज्य में इससे पहले इस तरह की भ्रष्ट सरकार सत्ता में नहीं आयी थी।

सारधा चिटफंड घोटाले से नारद  स्टिंग ऑपरेशन तक इस चुनाव में भ्रष्टाचार अन्य प्रमुख मुद्दों में से एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तृणमूल सरकार पर कटाक्ष किये जाने के मसले पर पूछे जाने पर माकपा नेता ने आरोप लगाया कि तृणमूल और भाजपा की नीति समान है।


--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

Let us count the numbers at home as sixth secularist blogger,writer,publisher has been killed in Bangladesh! Palash Biswas

Let us count the numbers at home as sixth secularist blogger,writer,publisher has been killed in Bangladesh!

Palash Biswas


Free market economy has merged the nation states and it banks on hatred and violence,war and civil war.The forces against humanity and nature align worldwide irrespective of color, identity, religion,race and nationalism.


We should first learn this lesson in objective perspective.

Only then we may be able where the mafia network of murderers and rapists base within the nation and beyond.


What is happening in Bangladesh is a reflection within our borders and we fail to see the rivers full of blood flowing every where every time and the killers are feel to kill any one who stands for humanity and nature.


Thus,Nazimuddin Samad -- the sixth secularist writer or publisher to have been killed in Dhaka in the last 14 months.


It reflects the truth that secularism is not an ideological discourse only as we treat it In India.Rather we have to yet prove our commitment to secularism as Indian nation as well as the idea of India are enveloped with intolerance injected with unprecedented violence and we could not stand united,we the so called democrat and secular forces.


Thus,secularism is reduced to appeasement of certain sections to make them mobile vote bank so that the hegemony of apartheid could bloom harvesting lotus.


Mind you,last year, suspected militants killed five secular writers and a publisher, including a Bangladeshi-American activist. A banned Islamist militant group, Ansarullah Bangla Team, claimed responsibility for some of the attacks.Just count the numbers at home.


Those killed in caste communal clash or simply killed,or killed in persecuted zone where rule of law means nothing and civic and human rights remain suspended as eternal deprivement and repression.


Those killers belong to the same class which want to capture this world and its resources all on the name of nationalism, religion,caste,race,development and even politics.


We have recognized it as essential evils of democracy.


It is the tolerance which makes us the soft scapegoats and we never feel anything while other are victimized and we are simply spared.


We may not be disturbed by civil war like condition in most part of the nation,military rule in some part of the country, persecution of indigenous and agrarian communities including the dalits,backwards,tribals and minorities.


It is a global phenomenon that free speech always invites the anger of the ruling hegemony and it is killed on the name of nationalism and religion,vedic violence.


Just see, attackers in Bangladesh wielding machetes killed a liberal blogger, police said on Thursday, the latest in series of murders of secular activists by suspected Islamist militants.


News from Bangladesh might not have any impact on us as we are engaged to save our skin in comfort zone and fail to understand the global phenomenon of the game which has a global network and we may not resist it without a vision which is free in its conscience.The conscience seems to be dead.


We are engaged in religious identities resulting in blind nationalism which targets every second citizen on the name of some false myths, symbols,identities with immense hatred and love is missing in day to day life.So missing is humanity.If it is a democracy then it is inhuman.


Postgraduate law student Nazimuddin Samad, 28, was attacked as he was returning from a class at his university in the capital, Dhaka, late on Wednesday, police said.



Police officer Tapan Chandra Shaha said three or four men attacked Samad with machetes and then shot him after he fell to the ground.


People heard the attackers shouting "Allahu akbar" (God is Greatest) as they fled, he said.


Imran H. Sarker, convener of the BOAN online activist group, said Samad was an outspoken critic of injustice and militancy.


"We found him always a loud voice against all injustice and also a great supporter of secularism," Sarker told Reuters.


Bangladesh has seen a wave of militant violence over the past year or so, including a series of bomb attacks on mosques and Hindu temples.


Some attacks have been claimed by Islamic State, including the killing of Hindu priest, a Japanese citizen, an Italian aid worker and a policeman.


The government denies that Islamic State has a presence in the Muslim-majority country of 160 million people.


Hundreds of students from the Jagannath University where Samad studied protested against his murder and demanded the prompt arrest of the killers.


They blocked roads in and around the university and told reporters that if those behind the earlier murders of bloggers had been punished then Samad would not have been attacked.


"Talented youths are killed one after another, but there are no visible measures against these heinous acts," said Kabir Chowdhury Tanmoy, president of the Online Activist Forum, which advocates secularism.


EU Ambassador to Bangladesh Pierre Mayaudon condemned the killing, saying freedom of expression was a fundamental human right.

Gaffar Khan Cowdhari ,the eminent Bangladeshi writer and Hasan Imam Sagar reports in Bangladeshi mainstream daily JANAKANTHA:

নাজিম হত্যার প্রতিবাদে রাস্তা অবরোধ বিক্ষোভ জবি শিক্ষার্থীদের

  • জড়িত কেউ শনাক্ত হয়নি
  • দায় স্বীকার করেনি কেউ
  • রবিবার থেকে লাগাতার ধর্মঘটের ডাক


গাফফার খান চৌধুরী/হাসান ইমাম সাগর ॥ জঙ্গীদের হাতে খুন হওয়া মুক্তমনা লেখকদের কাতারে যোগ হলো আরেকটি নাম। তিনি জগন্নাথ বিশ্ববিদ্যালয়ের ছাত্র ও অনলাইন এ্যাক্টিভিস্ট নাজিম উদ্দিন সামাদ। তার গ্রামের বাড়ি সিলেটে চলছে শোকের মাতম। নাজিম হত্যায় বৃহস্পতিবার সন্ধ্যা পর্যন্ত কেউ গ্রেফতার হয়নি। তবে ঘটনার সময় নাজিমের সঙ্গে থাকা বন্ধু সোহেলকে খুঁজছে আইনশৃঙ্খলা রক্ষাকারী বাহিনী। ব্যক্তিগত বা প্রেমঘটিত কারণ ছাড়াও হত্যাকা-ের সঙ্গে কোন উগ্র মৌলবাদী বা জঙ্গী সংগঠন বা জামায়াত-শিবির জড়িত থাকতে পারে বলে তদন্ত সংশ্লিষ্টদের ধারণা।

পহেলা বৈশাখ ও যুদ্ধাপরাধ মামলায় জামায়াতে ইসলামীর আমির মতিউর রহমান নিজামীর মৃত্যুদ- কার্যকরের আগে নাজিমকে অত্যন্ত পরিকল্পিতভাবে হত্যা করা হতে পারে। যদিও বৃহস্পতিবার সন্ধ্যা পর্যন্ত নাজিম হত্যার সঙ্গে কারা জড়িত তা নিশ্চিত হওয়া যায়নি। এবারই প্রথম কোন অনলাইন এ্যাক্টিভিস্টকে হত্যার পর দায় স্বীকারের ঘটনা ঘটেনি। এটি হত্যাকারী বা হত্যাকারী সংগঠনের নতুন কৌশল কি-না, সে বিষয়ে বিস্তর পর্যালোচনা চলছে। নাজিমকে হত্যার প্রতিবাদে জগন্নাথ বিশ্ববিদ্যালয়ের সামনে ছাত্ররা রাস্তা অবরোধ করে আগুন জ্বেলে বিক্ষোভ দেখিয়েছে। প্রতিবাদ সমাবেশ থেকে শনিবার রাত বারোটার মধ্যে হত্যাকারীদের গ্রেফতার করতে না পারলে রবিবার থেকে লাগাতার ধর্মঘটের ডাক দিয়েছেন আন্দোলনরত শিক্ষার্থীরা। এ ঘটনায় প্রতিবাদ জানিয়েছে জাতিসংঘ।

যেভাবে হত্যা করা হয় ॥ গত ৬ এপ্রিল বুধবার রাত নয়টার দিকে রাজধানীর সূত্রাপুর থানাধীন একরামপুর মোড়ে পৌঁছে নাজিম উদ্দিন ও তার বন্ধু সোহেল এবং রাজীব। এ সময় দুটি মোটরসাইকেলে চোখের পলকে সেখানে হাজির হয় ৪-৫ জন। পেছন থেকে তিনজন নেমে যায়। নেমেই দুইজন নাজিমের মাথায় ধারালো অস্ত্র দিয়ে কুপিয়ে জখম করে। ধারালো অস্ত্রের আঘাতে নাজিমের মাথার মগজ বেরিয়ে পড়ে। এরপর মৃত্যু নিশ্চিত করতে মাথায় গুলি চালায়। মাত্র এক থেকে দেড় মিনিটের মধ্যেই নাজিমকে হত্যার পর দ্রুত মোটরসাইকেলে করে ঘটনাস্থল ত্যাগ করে। হত্যার সময় হত্যাকারীরা আল্লাহু আকবর ধ্বনি দিয়ে নাজিমকে এলোপাতাড়ি কোপানো শুরু করে। সোহেল ও রাজীব এ সময় কৌশলে পালিয়ে যায়। তাদের খুঁজছে আইনশৃঙ্খলা রক্ষাকারী বাহিনী।

নাজিমের পরিচিতি ॥ নিহতের ভাতিজা সুমন জনকণ্ঠকে বলেন, নাজিম (২৬) বঙ্গবন্ধু জাতীয় যুব পরিষদের সিলেট জেলা শাখার তথ্য ও গবেষণা সম্পাদক ছিলেন। এছাড়া নাজিম সিলেটে গণজাগরণ আন্দোলনের সংগঠক ছিলেন। সিলেটের বিয়ানীবাজার উপজেলার তিলপাড়া ইউনিয়নের টোকাভড়াউট গ্রামের মরহুম আব্দুস সামাদের ছেলে ছিলেন তিনি। পাঁচ ভাই দুই বোনের মধ্যে নাজিম পঞ্চম ছিলেন। আর ভাইদের মধ্যে চতুর্থ। বড়ভাই জুলহাস উদ্দিন মারা গেছেন। ভাইদের মধ্যে শামীম আহমদ ও সবার ছোট জসিম উদ্দিন যুক্তরাজ্য এবং সুনাম উদ্দিন ফ্রান্স প্রবাসী। নিহতের মায়ের নাম তৈরনেচ্ছা। বোন পারুল বেগম ও নাসিমা বেগম বিয়ানীবাজারে নিজবাড়িতে বসবাস করেন। বড় বোন পারুল বেগমের বিয়ে হয়েছে কয়েক বছর আগে। মা ও বোন বিয়ানীবাজারে থাকলেও লেখাপড়া করার জন্য দীর্ঘদিন ধরে নাজিম সিলেট নগরীতে বসবাস করেছেন।

নাজিমের লেখাপড়া ॥ সিলেটের বিয়ানীবাজারের আসিরগঞ্জ দিশারী প্রিক্যাডেট স্কুল থেকে প্রাইমারি, আসিরগঞ্জ উচ্চ বিদ্যালয় থেকে এসএসসি এবং সিলেটের স্কলার্স হোম স্কুল এ্যান্ড কলেজ থেকে এইচএসসি পাস করেন নাজিম। পরে তিনি সিলেট লিডিং ইউনিভার্সিটি থেকে এলএলবি অনার্স পাস করেন। সিলেটে পড়াশোনাকালীন নগরীর মজুমদারপাড়া এলাকায় একটি মেসে থাকতেন। পরবর্তীতে তিনি একাধিক মেস পরিবর্তন করেছেন। এরপর ঢাকায় জগন্নাথ বিশ্ববিদ্যালয়ে এলএলএম-এ ভর্তি হন। তিনি জগন্নাথ বিশ্ববিদ্যালয়ের আইন বিভাগের ষষ্ঠ ব্যাচের সান্ধ্যকালীন সেশনের শিক্ষার্থী ছিলেন। নাজিম পঞ্চম শ্রেণীতে বৃত্তি পেয়েছেন। তার একাডেমিক রেজাল্ট ভাল। নাজিমের গ্রামের বাড়িতে শোকের মাতম চলছে। শত শত মানুষ ভিড় করেছেন নাজিমদের বাড়িতে। সবাই হত্যাকারীদের দৃষ্টান্তমূলক শাস্তি দাবি করেছেন।

নাজিমের আশঙ্কাই সত্যি হলো ॥ গণজাগরণ মঞ্চের পক্ষে ও যুদ্ধাপরাধীদের বিচারের দাবিতে সোচ্চার থাকায় হামলার আশঙ্কা করেছিলেন নাজিম উদ্দিন সামাদ। শিক্ষক, বন্ধু ও প্রিয়জনদের কাছে আশঙ্কার কথা জানালেও নিজের অবস্থান থেকে সরে আসেননি নাজিম। আজহারুল ইসলাম নামে নাজিমের এক স্যার ফেসবুকে লিখেছেনÑ 'তোমার জন্য ভয় হয় নাজিম। একটু সাবধানে থাকো। দেখতেই তো পাচ্ছ কি হচ্ছে। সাবধানে থেকো।'

জবাবে নাজিম লিখেছিলÑ 'ভয় আমার নিজেরও হয় স্যার। অকালে মরে যাওয়ার ভয়। কিন্তু কি করবো স্যার। মাথা নত করে চুপ হয়ে বেঁচে থাকার চেয়ে এ মরণই বোধ হয় ভালো।'

ফেসবুকে আইনশৃঙ্খলা অবনতির বিষয়ে সরকারের কঠোর পদক্ষেপ চেয়ে স্ট্যাটাস দেয়ার ২৪ ঘণ্টা না পেরুতেই খুন হতে হলো নাজিমকে। তার খুন হওয়ার খবর শুনে স্ট্যাটাসে অগ্নিসারথি নামে একজন ফেসবুক বন্ধু লিখেছেনÑ 'নাজিম উদ্দিন ভাইয়ের সঙ্গে গত কয়েক দিন আগে চ্যাটিং হলো। উনার আশঙ্কাই আজ নির্মমভাবে সত্যি হলো।'

থানা পুলিশের বক্তব্য ॥ বৃহস্পতিবার সন্ধ্যায় সূত্রাপুর থানার ওসি তপন চন্দ্র সাহা জনকণ্ঠকে বলেন, নাজিমের লাশ তার ভাতিজার কাছে হস্তান্তর করা হয়েছে। লাশটি বর্তমানে ঢাকা মেডিক্যাল কলেজ হাসপাতালের হিমঘরে রয়েছে। এ ঘটনায় কোন মামলা হয়নি। তবে মামলা দায়েরের প্রস্তুতি চলছে। ঘটনার সময় নাজিমের সঙ্গে সোহেল ও বেসরকারী বিশ্ববিদ্যালয় সাউথ ইস্টের শিক্ষার্থী নাজিব ছিলেন বলে জানা গেছে। তাদের খোঁজা হচ্ছে।

সড়ক অবরোধ করে ছাত্রদের বিক্ষোভ ॥ নাজিম হত্যার প্রতিবাদে জগন্নাথ বিশ্ববিদ্যালয়ের সামনের সড়ক অবরোধ করে রাস্তায় আগুন জ্বেলে বিক্ষোভ করেছে ছাত্ররা। সকাল দশটা থেকে শুরু করে দুপুর পর্যন্ত রাস্তা অবরোধ ও বিক্ষোভ চলে। এ সময় প্রায় চার ঘণ্টা বিশ্ববিদ্যালয়ের সামনের রাস্তা বন্ধ ছিল। বিশ্ববিদ্যালয়ের শিক্ষার্থীরা প্রতিবাদে বিক্ষোভ মিছিল করে। মিছিলটি ক্যাম্পাস ঘুরে প্রশাসনিক ভবনে গিয়ে অবস্থান নেয়। সমাবেশ থেকে হত্যাকারীদের দ্রুত গ্রেফতার ও বিচারের দাবি জানানো হয়।

ঢাকা মহানগর গোয়েন্দা পুলিশের (ডিবি) ধারণা ॥ পুলিশের পাশাপাশি মহানগর গোয়েন্দা পুলিশের পূর্ব বিভাগ নাজিম হত্যার ঘটনাটি গুরুত্বের সঙ্গে ছায়া তদন্ত শুরু করেছে। তদন্ত সংশ্লিষ্ট সূত্রে জানা গেছে, নাজিম আইনজীবী হওয়ার স্বপ্ন নিয়েই চলতি বছরের জানুয়ারিতে ঢাকায় এসেছিলেন। ঢাকায় আসার পর পরই নাজিমকে খুন হতে হলো।

ডিবির একজন উর্ধতন কর্মকর্তা নাম প্রকাশ না করার শর্তে জানিয়েছেন, নাজিম হত্যার ঘটনায় নানা বিষয় সামনে রেখে তদন্ত চলছে। তদন্তে ব্যক্তিগত শত্রুতার বিষয়টিও প্রাধান্য পাচ্ছে। সিলেটে বসবাসকালে নাজিমের কোন শত্রু সৃষ্টি হয়েছিল কি-না, তা গুরুত্বের সঙ্গে খতিয়ে দেখা হচ্ছে। যদিও এখন পর্যন্ত তদন্তে সেরকম কোন সম্ভাবনার তথ্য জানা যায়নি। কারণ সিলেটে শত্রুতা হলে নাজিমকে সিলেটেই হত্যা করার কথা। হত্যা করা সম্ভব না হলেও অন্তত নাজিম এক বা একাধিকবার আক্রমণের শিকার হতে পারত। কিন্তু তার কিছুই হয়নি। এ কারণে ব্যক্তিগত শত্রুতার তেমন কোন আলামত মিলছে না।

নাজিম ফেসবুকে খুবই সক্রিয় ছিলেন। ফেসবুকে তার একজন মেয়ে বন্ধুর সঙ্গে বিশেষ সখ্যতার তথ্য পাওয়া গেছে। যদিও সেই ফেসবুক বন্ধু নিয়েও বির্তক আছে। কোন গোষ্ঠী পরিকল্পিতভাবে নাজিমকে হত্যার পরিকল্পনা বাস্তবায়ন করতে ওই মেয়েকে কাজে লাগাতে পারে। আবার ওই মেয়ের ছবি বা ফেসবুকের তথ্য সঠিক কি-না, তা নিয়েও সন্দেহ আছে। ধারণা করা হচ্ছে, পরিকল্পিতভাবে নাজিমের অবস্থান ও তার সার্বিক কর্মকা- জানার জন্য মেয়ে বন্ধুকে কাজে লাগানো হতে পারে। ফেসবুকের ওই মেয়ে বন্ধুরও সন্ধান চলছে।

তবে নাজিমকে যে মুহূর্তে হত্যা করা হয়েছে, তা বিশেষ ইঙ্গিত বহন করছে। কারণ নাজিম যুদ্ধাপরাধীদের সর্বোচ্চ শাস্তির বিষয়ে সোচ্চার ছিলেন। সামনে যুদ্ধাপরাধ মামলায় জামায়াতে ইসলামীর আমির মতিউর রহমান নিজামীর ফাঁসির রায় কার্যকরের কথা রয়েছে। এছাড়া আগামী ১৪ এপ্রিল বাংলা নববর্ষ। নববর্ষে জঙ্গী সংগঠনগুলো নানাভাবেই নাশকতা চালানোর চেষ্টা করছে। এজন্য পহেলা বৈশাখের অনুষ্ঠান পালনে বিশেষ কড়াকড়ি আরোপ করা হয়েছে। ঠিক এমন একটি সময়ে অনেকটা ফিল্মি স্টাইলে চোরাগোপ্তা হামলা করে নাজিমকে হত্যা করা হলো। নাজিম হত্যার ধরনের সঙ্গে আগে ব্লগার ও মুক্তমনা লেখক হত্যার ধরনের হুবহু মিল রয়েছে।

এজন্য নাজিম হত্যার সঙ্গে উগ্র মৌলবাদী বা জঙ্গী সংগঠন জড়িত বলে ধারণা জোরালো হচ্ছে। সাধারণত এ ধরনের হত্যাকা- নিষিদ্ধ জঙ্গী সংগঠন আনসারুল্লাহ বাংলা টিম করে থাকে। জঙ্গী সংগঠনটির সিøপার সেলের সদস্যদের এ ধরনের হত্যাকা-ের নজির আছে। সিøপার সেলের কর্মকা-ের সঙ্গে নাজিম হত্যার ধরণ মিলে যাচ্ছে।

- See more at: https://www.dailyjanakantha.com/details/article/183980/%E0%A6%A8%E0%A6%BE%E0%A6%9C%E0%A6%BF%E0%A6%AE-%E0%A6%B9%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%B0-%E0%A6%AA%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A6%A4%E0%A6%BF%E0%A6%AC%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A7%87-%E0%A6%B0%E0%A6%BE%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%A4%E0%A6%BE-%E0%A6%85%E0%A6%AC%E0%A6%B0%E0%A7%8B%E0%A6%A7-%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B7%E0%A7%8B%E0%A6%AD-%E0%A6%9C%E0%A6%AC%E0%A6%BF#sthash.WQERq1aR.dpuf



--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

Friday, April 8, 2016

दीदी के मुकाबले खड़ी दीपा दासमुंशी के साथ पर्चा दाखिल करते वक्त बदसलूकी! नेताजी वंशज चंद्र कुमार बोस नामांकन दाखिल करने गये तो दीदी की पुलिस ने भाजपाइयों को धुन डाला चुनाव आयोग और केंद्रीय वाहिनी का अता पता नहीं है,बंगाल में हिंसा जारी एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास हस्तक्षेप


दीदी के मुकाबले खड़ी दीपा दासमुंशी के साथ पर्चा दाखिल करते वक्त बदसलूकी!

नेताजी वंशज चंद्र कुमार बोस नामांकन दाखिल करने गये तो दीदी की पुलिस ने भाजपाइयों को धुन डाला

चुनाव आयोग और केंद्रीय वाहिनी का अता पता नहीं है,बंगाल में हिंसा जारी

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

हस्तक्षेप

बंगाल में सबसे खास चुनाव क्षेत्र कोलकाता है जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सत्तादल की उम्मीदवार है।


जाहिर है कि सत्तादल को यह सीट जीतने का भरोसा रहा होगा तभी उन्हें वहां से शत्ता में वापसी का रास्ता तैयार करने का विकल्प चुना गया है।लेकिन लगता है कि सत्तादल का आत्मविश्वास जीत के पक्के यकीन के बराबर नहीं है।


आज कोलकाता में अलीपुर द्वार में अजब गजब नजारा पेश आया जब नामांकन दाखिल करने वहां पहुंची वाम कांग्रेस गठबंधन की उम्मीदवार दीपा दासमुंशी के साथ बदसलूकी की गयी तो भाजपा उम्मीदवार नेताजी के वंशधर चंद्र कुमर बोस जब अपना पर्चा दाखिल कराने पहुंचे तो तृणूलियों की क्या कहें बिना बात पुलसकर्मियों ने भाजपाइयों को धुन डाला


दीपा दासमुंसी की शिकायत है कि चुनाव आयोग नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया में भी विपक्षी  उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम है और सौ मीटर के भीतर तृणमूलियों की भीड़ में उनसे बदसलूकी भी हो गया है।


मतदान के पहले चरण में जंगल महल के शालबनी से हिसां की लहरें उठीं और मतदान के दिन बूथ दखल कर लिये गये।


गठबंधन के वोटरों के अलावा भाजपा के वोटरों से मारपीट की गयी।माकपा उम्मीदवार और मीडियाकर्मी भी बख्शे नही गये।एक मीडियाकर्मी का अपहरण भी हो गया।


इसकी रपट आप हस्तक्षेप पर पहले ही पढ़ चुके होंगे।

उसी शालबनी में सौ फीसद तक मतदान हुआ और हिंसा के बावजूद चुनाव आयोग ने संज्ञान नहीं लिया।


दूसरी तरफ वीरभूम,मुर्शिदाबाद,नदिया और वर्दमान जिले तक से छिटपुट हिंसा की खबरें आ रही हैं।


चुनाव आयोग अगर निष्पक्ष न हुआ औरकेंद्रीय वाहिनी अगर तमाशबीन रही और भूतों के नाच के साथ साथ ममता बनर्जी की पुलिस वोटरों और एजंटों को बूथों से दूर खने में कामयाब रहे तो बंगल में दीदी अपराजेय है।


इसीका ड्रेस रिहर्सल कोलकाता में मीडिया के कैमरे के सामने हो गया।केंद्रीय वाहिनी कोलकाता में नजर नहीं आ रही और चुनाव आयोग कहां है,पता नहीं चल रहा।



-- 

Pl see my blogs;



Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

बंगाल हारे तो दांव पर देश,सो भूतों का नाच दिनदहाड़े जंगल महल में सौ फीसद मतदान का रिकार्ड चुनावों में आरोप लगते रहे हैं लेकिन केंद्र में जब तक संग बिरादरी है,तब तक दीदी सुरक्षित है और बंगाल के लिहाज से भाजपा काहौवा खड़ा करना भी मुसलमान वोटों की असुरक्षा को जनादेश में तब्दील करने का कायदा कानून है।इसलिए दीदी संघ परिवार को खुल्ला मैदान छोड़कर वाम लोकतांत्रिक गठबंधन के खिलाप खुद को लामबंद करके संघपरिवार के एजंडे को ही आगे बढ़ाने का काम कर रही है। दीदी ना हारे,इसके लिए केंद्रीय वाहिनी को तृणूल के भूतों की फौज का छाता बना दिया गया है।जिस जंगल महल के पहले चरण के मतदान में माकपा प्रत्याशी की पिटाई हो गयी और मीडिया कर्मी से लेकर भाजपा और माकपा के वोटर तक धुन डाले गये वहां शत प्रतिशत वोट का रिकार्ड कायम हुआ है। एक्सेकैलिबर स्टीवेंस विश्वास हस्तक्षेप

बंगाल हारे तो दांव पर देश,सो भूतों का नाच दिनदहाड़े

जंगल महल में सौ फीसद मतदान का रिकार्ड

चुनावों में आरोप लगते रहे हैं लेकिन केंद्र में जब तक संग बिरादरी है,तब तक दीदी सुरक्षित है और बंगाल के लिहाज से भाजपा काहौवा खड़ा करना भी मुसलमान वोटों की असुरक्षा को जनादेश में तब्दील करने का कायदा कानून है।इसलिए दीदी संघ परिवार को खुल्ला मैदान छोड़कर वाम लोकतांत्रिक गठबंधन के खिलाप खुद को लामबंद करके संघपरिवार के एजंडे को ही आगे बढ़ाने का काम कर रही है।


दीदी ना हारे,इसके लिए केंद्रीय वाहिनी को तृणूल के भूतों की फौज का छाता बना दिया गया है।जिस जंगल महल के पहले चरण के मतदान में माकपा प्रत्याशी की पिटाई हो गयी और मीडिया कर्मी से लेकर भाजपा और माकपा के वोटर तक धुन डाले गये वहां शत प्रतिशत वोट का रिकार्ड कायम हुआ है।

एक्सेकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

हस्तक्षेप

चुनाव आयोग ने 81 पीसद से मतदान का जो 84 फीसद संशोधित आंकड़ा जारी किया है,उसने बंगाल में दिनदहाड़े भूतों के नाच समां बांध दिया है।


बिनपुर विधानसभा क्षेत्र के 18 नंबर लालजला विद्यालय में सौ फीसद वोट पड़े तो शालबनी के 82नंबर कियामाछा बूथ पर निनानब्वे फीसद वोट दर्ज किये गये।शालबनी के ही 14 नंबर हातिमशानु बूथ में 97 फीसद मतादान हुआ।


पहले चरण के मतदान के दौरान वोटरों.मीडिया कर्मियों से और यहां तक कि वहां के माकपा प्रत्याशी से इसी शालबनी में मारपीट सबसे ज्यादा हुई और केंद्रीय वाहिनी तमाबीन बनी रही।वहीं मतदान शत प्रतिशत है तो चुनाव आयोग और केंद्रीय वाहिनी की भूमिका आप खुद समझ लें।


वैसे भी मुख्य चुनाव आयुक्त ने बंगाल में मतदान के अगले चरणों में वोटरों से शत प्रतिशत मतदान करने की अपील जंगल महल में कथित शांतिपूर्ण मतदान के बाद मतदान 81 फीसद होने की घोषणा के साथ कर दी है।


इस लिहाज से चुनाव आयोग को बाकी बंगाल में इसी तरह शत प्रतिशत मतदान होने पर गड़बड़ी कुछ नजर नहीं आने वाली है।


बहरहाल,मेदिनीपुर के 108 नंबर बूथपर 98.48 प्रतिशत,तालडांगरा विधानसभा क्षेत्र के 84 नंबर बूथ पर 96 प्रतिशत और बांदोवान के पाटापहाड़ी प्राथमिक विद्यालय बूथ पर 94-78 प्रतिशत मतदान का आंकड़ा बना है।


यही सिलसिला अगले चरणों में जारी रहा तो दीदी की सत्ता बहाल रहने में कोई ज्यादा दिक्कत होनी नहीं चाहिए।ऐेसे में सारा का सारा चुनाव किसी प्रहसन से कम नहीं होगा।

इसी बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने ईवीएम मशीन में खराबी की शिकायत के आधार पर मेदिनीपुर व रानीबाग विधानसभा क्षेत्रों के दो बूथों पर पुनर्मतदान कराने की घोषणा की है। मेदिनीपुर 237 विधान सभा क्षेत्र संख्या के विवेकानंद शिक्षा निकेतन  240 नंबर बूथ  व 249 रानीबाग विधानसभा केंद्र के रानीबाग उच्च बालिका विद्यालय के230 नंबर बूथ पर 11 अप्रैल को फिर से मतदान कराया जायेगा।


शालबनी में पुनर्मतदान शिकायतों के बावजूद नहीं कराया जा रहा है।

बहरहाल संवाददाताओं को मतदान के प्रतिशत में गड़बड़ी की शिकायत के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी अमित ज्योति भट्टाचार्य ने बताया कि वह आकड़े मतदान केंद्र से मिली जानकारी के आधार पर ही अपलोड किये जाते हैं।

निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि कांग्रेस प्रत्याशी मानस भुंइया ने खड़गपुर के एएसपी अभिषेक गुप्ता पर नारायण गढ़ व सबंग के थाना प्रभारी को शासक दल के पक्ष में मतदान करवाने के लिए दबाव देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एसपी भारती घोष के इशारे पर इस कार्य को उन्होंने अंजाम दिया है।


कोलकाता के आस पास के राजनीतिक कार्यकर्ता हस्तक्षेप से लगातार संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं।


हमने उन्हें साफ कर दिया है कि हम सच ही लिखेंगे।


उनका सच भी हम साझा करेंगे।

यह जनसुनवाई का मंच है और हम किसी के पक्ष में नहीं हैं सच के सिवाय।


बहरहाल बंगाल में संघ परिवार का दांव बहुत बड़ा हो गया है।गुपचुप गठजोड़ का किस्सा खुला होते न होते दीदी और ममता की ओर से लुकाछिपी की होड़ मची है।


मोदी ने दीदी को बंगाल के चुनाव प्रचार अभियान में सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है।जबकि केंद्र सरकार नारद स्टिंग के वीडियो का सच जानने की कोई पहल भी नहीं कर रही है।


मोदी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर मौत की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए गुरुवार को कहा कि कोलकाता में हुआ फ्लाईओवर हादसा 'दैविक संदेश' है कि लोग बंगाल को तृणमूल कांग्रेस से बचाएं। यह एक्ट ऑफ गॉड नहीं एक्ट ऑफ फ्रॉड है। प्रधानमंत्री ने कहा कि फ्लाईओवर गिर गया, यदि गणमान्य लोग वहां जाते तो क्या करते। वे कुछ लोगों को बचाने का प्रयास करते और बचाव अभियान में सहायता करते। लेकिन दीदी (ममता बनर्जी) ने क्या किया?


मोदी ने दीदी पर हमले के लिए इसी नारद स्टिंग के आरोपों को ही दोहराया है।यह सरासर गलत है क्योंकि वे प्रधानमंत्री हैं और किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ आरोपों को दोहराने से पहले सच को जांच लेना उनकी जिम्मेदारी बनती है।




प. बंगाल में दूसरे चरण के मतदान के लिए प्रचार करने अलीपुर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को ममता सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ममता जब दिल्ली आती हैं, तो सोनिया गांधी से जरूर मिलती हैं, लेकिन उनकी मीटिंग में आने से कतराती हैं। मोदी ने तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और वामदलों के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने दीदी पर सोनिया गांधी से मिले होने का आरोप लगाया। मेरी मीटिंग में नहीं आती हैं दीदी... -मोदी ने कहा, ''मेरी मीटिंग में दीदी नहीं आती हैं, लेकिन जब भी दिल्ली आती हैं सोनिया जी से आशीर्वाद जरूर लेती हैं''। - ''अगर आपको केंद्र सरकार से कोई शिकायत है तो हमें भी बताइए। लेकिन नहीं कुछ भी हो मीटिंग में नहीं जाएंगी।''


अपने भाषण के दौरान मोदी राज्य सरकार पर जमकर बरसे। ममता दीदी पर करारा हमला करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा की उन्हें राज्य की जनता की चिंता नहीं हैं। कहा कि यह सरकार मां, माटी और मानुष को लेकर बनी थी लेकिन अब ये मनी मतलब पैसे पर केंद्रीत हो गए हैं। नरेंद्र मोदी ने इस दौरान लेफ्ट पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा की 2011 में लोगों ने ममता बनर्जी को बड़ी उम्मीदों के साथ राज्य की कमान सौंपी थी मगर ममता दीदी ने लेफ्ट के ही काम को आगे बढ़ाने का काम किया।


मोदी ने ममता और वाममोर्चा पर आरोप लगाया कि ममता और वाममोर्चा की दिलचस्पी बंगाल के कल्याण या भविष्य में नहीं है। उन्होंने लोगों से तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए वोट देने और राज्य में विकास के लिए भाजपा को मौका देने की अपील की। पश्चिम बंगाल के गौरवमयी इतिहास को याद करते हुए मोदी ने कहा, स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस, वाम मोर्चा और अब दीदी (ममता) सभी ने बंगाल की बर्बादी की तस्वीर पेश की। चाहे वाम हो या दीदी हो, ये दोनों आपके भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकते हैं।


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आरोप लगाया कि वह रिश्वत के साथ तालमेल कर रहीं हैं और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस 'आतंक, मौत तथा भ्रष्टाचार' का पर्याय बन गई है। उन्होंने कांग्रेस पर भी राजनीतिक फायदे के लिए राज्य में 'वामपंथियों के पैरों में गिरने' का आरोप लगाया। मोदी ने आसनसोल में एक चुनावी सभा में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ टीवी पर नारद का स्टिंग ऑपरेशन दिखाया गया। यह बड़ा स्कैंडल था लेकिन क्या दीदी ने उनके खिलाफ कोई कदम उठाया या उन्हें पार्टी से निकाला?


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर राज्य में भ्रष्टाचार और हिंसा फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनी तो बांग्लादेश से लगातार आ रहे घुसपैठियों को बंगाल छोड़ना ही होगा क्योंकि रोजगार के हकदार यहां के युवा हैं।


पीएम ने कहा बंगाल में मां, माटी, मानुष की जगह मौत ने ली. अलीपुरद्वार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए ममता सरकार पर जमकर हमला बोला। पीएम ने कहा कि पिछले चुनाव में हम सुनते थे मां, माटी और मानुष और पिछले पांच सालों में लोगों को सिर्फ मौत, मौत और मौत ही सुनाई दी। नारदा स्टिंग ऑपरेशन का जिक्र छेड़ते हुए पीएम ने लोगों से कहा कि नारदा याद है ना, जो लोग मां, माटी, मानुष की बात करते थे वो मनी ले रहे थे।


जो आरोप मोदी दीदी के खिलाफ लगाये हैं,उन्हें बहरहाल वैधता मिल गयी है उनके राजकाज का मुखिया होने की वजह से।


अब केंद्रीय सरकार और केंद्रीय एजंसियों की जवाबदेही बनती है कि इन आरोपों का सचजनता के सामने जल्द से जल्द उजागर करें।दीदी को ऐसा कहना चाहिए था।लेकिन वे जबाव में भाजपा को तो दंगाबाज सरकार कह रही है लेकिन केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री के खिलाफ एक भी शब्द नहीं कह रही है जौसा उनने पिछले लोकसभा चुनावों में कहा था।


दूसरी ओर मोदी के इस बार के चुनाव अभियान में धर्मोन्माद और कट्टर हिदुत्व के बजाय दीदी और उनकी सरकार के भ्रष्टाचार के मुद्दे खास अहम है।


जाहिर है कि पिछले लोकसभा चुनावों के अनुभवों के मद्देनजर और मनुस्मृति की ओर से दुर्गा के आवाहन के फेल हो जाने के मद्देनजर संघ परिवार को मालूम हो गया है कि बंगाल में कमसकम फौरन धर्मोन्मादी ध्रूवीकरण असंभव है।


इसके उलट दीदी मुसलिम बहुल क्षेत्रों में भाजपा को दंगाबाज कह जरुर रही हैं लेकिन उनके हमले के निशाने पर वाम और कांग्रेस हैं।


जाहिर है कि निशाना कहीं है और वार कहीं कर रहे हैं मोदी।दीदी के किलाफ न बोलने पर संघपरिवार मैदान से बाहर है और बंगाल के सभी सीचों पर जमानत जब्त हो जाने की हालत में केरल तमिलनाडु और पुडुचेरी में सिफर के साथ असम में भी शिकस्त की पूंजी लेकर हिंदुत्व का एजंडा बाकी राज्यों के चुनाव में संघ परिवार को कहीं का नहीं छोड़ेगा।


इसलिए मजबूरी का नाम बाबासाहेब अंबेडकर है।


जाति उन्मूलन के बाबासाहेब के मिशन के खिलाफ रंगभेदी वर्चस्व बनायेरखने और आरक्षण को खत्म करने के हर इंतजाम के बावजूद जैसे बाबासाहेब को ईश्वर बनाने पर तुला है संघपिरवार ,ठीक वैसे ही बंगाल से खाली हाथ लौटना ना पड़े इसके लिए दीदी को जिताने की गरज और एजंडे के बावजूद संघ परिवार के सिपाहसालारों को झख मारकर दीदी के खिलाफ हमलावर रवैया अपनाना पड़ रहा है।

दीदी भली भांति जानती है कि उनका रक्षा कवच संघ परिवार है और दोनों का साझा दुश्मन वाम लोकतांत्रिक गठबंधन है,जिसके बंगाल के नतीजे के बाद वायरल हो जाने का अंदेशा है।


चुनावों में आरोप लगते रहे हैं लेकिन केंद्र में जब तक संग बिरादरी है,तब तक दीदी सुरक्षित है और बंगाल के लिहाज से भाजपा काहौवा खड़ा करना भी मुसलमान वोटों की असुरक्षा को जनादेश में तब्दील करने का कायदा कानून है।


इसलिए दीदी संघ परिवार को खुल्ला मैदान छोड़कर वाम लोकतांत्रिक गठबंधन के खिलाफ खुद को लामबंद करके संघ परिवार के एजंडे को ही आगे बढ़ाने का काम कर रही है।


जाहिर है कि दीदी ना हारे,इसके लिए केंद्रीय वाहिनी को तृणूल के भूतों की फौज का छाता बना दिया गया है।जिस जंगल महल के पहले चरण के मतदान में माकपा प्रत्याशी की पिटाई हो गयी और मीडिया कर्मी से लेकर भाजपा और माकपा के वोटर तक धुन डाले गये वहां शत प्रतिशत वोट का रिकार्ड कायम हुआ है।


इसी बीच  मुख्यमंत्री व भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार ममता बनर्जी ने शुक्रवार को अलीपुर स्थित  ट्रेजरी कार्यालय में नामांकन पत्र दाखिल किया। इस अवसर पर उनके साथ प्रदेश तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष सुब्रत बक्शी, तृणमूल कांग्रेस के उपाध्यक्ष व सांसद मुकुल राय व अन्य उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि सुश्री बनर्जी दूसरी बार भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से प्रतिद्वंद्विता कर रही हैं।


गौरतलब है कि भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की दीपा दासमुंशी व सुभाष चंद्र बोस के परपौत्र चंद्र बोस प्रतिद्वंद्विता कर रहे हैं। इस अवसर पर तृणमूल समर्थकों की भारी भीड़ थी तथा वे मां, माटी, मानुष व ममता बनर्जी जिंदावाद के नारे लगा रहे थे। शुक्रवार को ही कोलकाता पोर्ट विधानसभा क्षेत्र से शहरी विकास मामलों के मंत्री फिरहाद हकीम, बेहला पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार व राज्य के उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी, रासबिहारी विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार व विधानसभा में सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने भी नामांकन पत्र जमा दिया।


--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

Thursday, April 7, 2016

मोदी के खुल्ला हमलों के बावजूद दीदी क्यों खामोश हैं?खामोशी की वजह क्या हैं? मुख्यचुनाव आयुक्त कल तक हिसाब दे रहे थे कि पहले चरण में मतदान 81 फीसद हुआ और 48 घंटे में मतदान फीसद 84 फीसद हो गया है।इस पर सवाल सीधे यही उठ रहा है कि ये वोट बूथों के हैं या भूतों के।विशेषज्ञ आंकड़ों की इस बाजीगरी को हैरतअंगेज मान रहे हैं।वैसे तीन फीसद ज्यादा वोट चुनाव नतीजे बदलने के लिए काफी होने चाहिेए। एक्सकैलिबर स्टीवेस विश्वास


मोदी के खुल्ला हमलों के बावजूद दीदी क्यों खामोश हैं?खामोशी की वजह क्या हैं?


मुख्यचुनाव आयुक्त कल तक हिसाब दे रहे थे कि पहले चरण में मतदान 81 फीसद हुआ और 48 घंटे में  मतदान फीसद 84 फीसद हो गया है।इस पर सवाल सीधे यही उठ रहा है कि ये वोट बूथों के हैं या भूतों के।विशेषज्ञ आंकड़ों की इस बाजीगरी को हैरतअंगेज मान रहे हैं।वैसे तीन फीसद ज्यादा वोट चुनाव नतीजे बदलने के लिए काफी होने चाहिेए।

एक्सकैलिबर स्टीवेस विश्वास

उत्तराखंड जीतने के लिए बेहद खास है।बंगाल का चुनाव संघ परिवार के लिए आगे पंजाब,यूपी और उत्तराखंड जीतने के लिए संघ परिवार हर कीमत पर वाम कांग्रेस गठबंधन को रोकनेके लिए काम कर रहा है और दीदी की भूमिका इसमें खास है।


मोदी के खुल्ला हमलों के बावजूद दीदी क्यों खामोश हैं,खामोशी की वजह क्या हैं,यह अबूझ पहेली है।


जाहिर है कि पहले चरण के मतदान के बाद केसरिया फौजों की कमान संभाले सर्वोच्च सिपाहसालार मैदाने जंग में कूद पड़े हैं और संघ परिवार के तमाम रथी महारथी बंगाल में वाम लोकतांत्रिक गठबंधन को रोकने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे।


विकास के मुद्दे को लेकर ममता बनर्जी ने जो अखबारी तैयारी की थी,भ्रष्टाचार के खुलासे के मीडिया के चौबीसों घंटे की मुहिम के चलते उसका बंटाधार हो गया है।


इसी बीच पहले चरण के मतदान के बाद वाम,कांग्रेस और भाजपा तीनों पक्ष की शिकायतों के बाद केंद्रीय वीहिनी को मतदान में वोटों की पहरेदारी में लगाने के लिए चुनाव आयोग के जो फरमन जारी हुए हैं,उसके बाद सत्ता दल के भूत बिरादरी का नया कारनामे का खुलासा हुआ है।


मुख्यचुनाव आयुक्त कल तक हिसाब दे रहे थे कि पहले चरण में मतदान 81 फीसद हुआ और 48 घंटे में  मतदान फीसद 84 फीसद हो गया है।इस पर सवाल सीधे यही उठ रहा है कि ये वोट बूथों के हैं या भूतों के।विशेषज्ञ आंकड़ों की इस बाजीगरी को हैरत्ंगेज मान रहे हैं।वैसे तीन फीसद ज्यादा वोट चुनाव नतीजे बदलने के लिए काफी होने चाहिेए।


इससे पहले ऐसा किसी चुनाव में हुआ हो या नहीं मालूम लेकिन ईवीएम मशीन के जमाने में मतदान के आंकड़ों में यह संशोधन बताता है कि चुनाव परिणाम आने तक बहुत कुछ बदल सकता है यानी जनादेश तक बदल सकता है।


सबसे मजेदार बात तो यह है कि बंगाल में पहली चुनाव सभा में ही मोदी महाशय ने मां माटी मानुष सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेर लिया और शारदा चिटफंड से लेकर बड़ाबाजार के फ्लाई ओवर ,नारद स्टिंग में उजागर घूसखोरी से लेकर सिंडिकेट मार्फत सत्तादल की अंधाधुंध काली कमाई,हर मुद्दे पर उन्होंने सिलसिलेवार ममता बनर्जी पर हमले किये।


इसके उलट  ममता बनर्जी ने न मोदी पर और न भाजपा पर पलटवार किये।ऐसा ईंट का जवाब पत्थर से देने वाली दीदी के चरित्र के विपरीत है तो दीदी के वाम कांग्रेस गठबंधन के खिलाफ हमले लगातार तेज होते जा रहे हैं और उनकी एकमात्र फिक्र यह है कि इस गठबंधन के खिलाफ जीत कैसे हासिल की जाये।


देखकर ऐसा लगता है कि भाजपा या तो चुनाव में है ही नहीं,न केंद्र और राज्य के नेता उन्हें घेर रहे हैं या फिर भाजपा से दीदी का गुपचुप तकोई समझौता है जिसके तहत वे बोल ही नहीं रही हैं।


दीदी के चुनावक्षेत्र भवानीपुर में भाजपा के तमाम लाउडस्पीकर बंद हैं जहां कल तक भाजपा को बढ़त मिली हुई थी।जबकि वहां भाजपा ने नेताजी फाइलों के जरिये नेताजी की विरासत दखल करने के फिराक में नेताजी परिवार के चंद्र कुमार बोस को उम्मीदवार बनाया है,जो अबतक भूमिगत ही हैं।


बल्कि मोदी ने मदरीहाट की चुनाव सभा में सीधे आरोप लगाया कि कोलकाता के केंद्र स्थल में हुए फ्लाईओवर हादसे में पीड़ितों के बचाव व राहतअभियान पर ध्यान देने के बजाय दीदी ने हादसे की जिम्मेदारी वामदलों पर चालने की कोशिश की है।


 गौरतलब है कि कोलकाता में मतदान से पहले मलबा हटाये जाने की कोई संभावना नहीं है।


गौरतलब है कि उस इलाके में जोड़ासांको की विधायक स्मिता बख्शी के रिश्तेदार फंसे हुए हैं और वहां भाजपा का पूर्व अध्यक्ष राहुल सिन्हा मैदान में हैं।वहां तीन तीन वार्डों में भाजपा के काउंसिलर भी हैं।


इसी सिलसिले में यह भी बता दें कि मोदी ने जो कहा नहीं है,वह यह है कि वाम कार्यकर्ताओं को हादसे के वक्त बचाव व राहत के बहाने मौके पर पहुंचने ही नहीं दिया गया और उनकी तरफ से जो रक्तदान किया गया,उसे घायलों की रगों में पहुंचने ही नहीं दिया गया।यह अमानवीय कृत्य भी बंगाल में बड़ा मुद्दा है।

सिंडिकेट की चर्चा करते हुए उत्तर बंगाल में चंदन तस्करी के मामले में भी मोदी ने दीदी को घेरा और दीदी खामोश हैं।


--

Pl see my blogs;



Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!


--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

हवा खराब है तो वोटरों से माफी मांगने लगी दीदी! हवा क्रमशः वाम कांग्रेस गठबंधन की मजबूत होते देखकर,रोज रोज के मीडिया धमाकों और मुसलिम वोट बैंक के टूटने से दीदी की भाषा बदल गयी है। बंगाल में हिंदुत्व एजंडा के हक में कोई खड़ा नहीं है और न ही फिजा में दंगाई आगजनी है,इसकी खास वजह है बाकी देश के मीडिया के विपरीत हिंदुत्व को बंगाल में मीडिया का कोई समर्थन नहीं है। जाहिर है कि जनमत का आइना भले मीडिया को आप न कहे,न जनसुनवाई का कोई मच आप इसे माने,इस मुक्तबाजार में मीडियाबहुत बड़ी ताकत है और वह चाहे तो निरंकुश सत्ता की भी चूलें हिला कर रख दें। एकसकैलिबर स्टीवेंस विश्वास हस्तक्षेप

हवा खराब है तो वोटरों से माफी मांगने लगी दीदी!

हवा क्रमशः वाम कांग्रेस गठबंधन की मजबूत होते देखकर,रोज रोज के मीडिया धमाकों और मुसलिम वोट बैंक के टूटने से दीदी की भाषा बदल गयी है।


बंगाल में हिंदुत्व एजंडा के हक में कोई खड़ा नहीं है और न ही फिजा में दंगाई आगजनी है,इसकी खास वजह है बाकी देश के मीडिया के विपरीत हिंदुत्व को बंगाल में मीडिया का कोई समर्थन नहीं है।

जाहिर है कि जनमत का आइना भले मीडिया को आप न कहे,न जनसुनवाई का कोई मच आप इसे माने,इस मुक्तबाजार में मीडियाबहुत बड़ी ताकत है और वह चाहे तो निरंकुश सत्ता की भी चूलें हिला कर रख दें।

एकसकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

हस्तक्षेप

आज ही परिवर्तन जमाने में दीदी की हवा बनाने वाले बंगाल के सबसे बड़े अखबार में ब्यौरे वार यह खुलासा हुआ है कि सिर्फ प्रोमोटर बिल्डर राज के तहत मार्फत सत्तादल का अन्नदाता बना हुआ है सिंडिकेट और कैसे सत्तादल को सालाना कमसकम डेढ़ सौ करोड़ रुपये की आमदनी लोगों की जान माल से खिलवाड़ करने की वजह से होती है तो दूसरी तरफ सत्ता के प्रति अनास्था का आलम यह है कि सत्तादल के सबसे बड़े किले कोलकाता के बड़ाबाजार में ध्वस्त अधबने फ्लाईओवर को पूरा का पूरा ढहाने के लिए ांदोलन शुरु हो गया है।


कोलकाता और विधाननगर के मेयरों के स्टिंग के जवाब में सत्तदल के पास अब शारदा मामले की तरह कोई सफाई नहीं है।


बंगाल में हिंदुत्व एजंडा के हक में कोई खड़ा नहीं है और न ही फिजा में दंगाई आगजनी है,इसकी खास वजह है बाकी देश के मीडिया के विपरीत हिंदुत्व को बंगाल में मीडिया का कोई समर्थन नहीं है।


जाहिर है कि जनमत का आइना भले मीडिया को आप न कहे,न जनसुनवाई का कोई मच आप इसे माने,इस मुक्तबाजार में मीडियाबहुत बड़ी ताकत है और वह चाहे तो निरंकुश सत्ता की भी चूलें हिला कर रख दें।


कल तक इंच इंच का बदला लेने की धमकी देकर शेरनी की तरह दहाड़ने वाली ममता बनर्जी के बोल बदल गये हैं और वे कहने लगी हैं कि घूस जो लेते हैं,उनसे कम बड़ा अपराध उनका नहीं है जो घूस देते हैं।


नारद स्टिंग में रोज नये नये धमाकों के जवाब में दीदी की यह सफाई है जिसमें अब वह ताल ठोंककर दावा कतई नहीं कर रही हैं कि घूसखोरी कोरी गप्प है या उनकी पार्ची के लोग बेदाग हैं जैसे वे शारदा चिटफंड घोटाले के मामले में चीख चीखकर कह रही थीं।बल्कि उनकी इस सफाई से दाल में काला जरुर कुछ है,ऐसा ही साबित होने लगा है।


कामरेड बुद्धदेव भट्टाचार्यको भारी बहुमत की वजह से सबकुचहरा ही हरा नजर आ रहा था और वे न विपक्ष को और न मीडिया को और न जनमत को कौड़ी का भाव दे रहे थे।


तब समूचा मीडिया सिविल सोसाइटी के साथ वाम शासन को उखाड़ने में लग गया।बाजार की तमाम शक्तियां उनके साथ थी तो दीदी को जंगल महल के माओवादियों का खुल्ला समर्थन था।


अब हूबहू वही दुहराया जा रहा है और फर्क यह है कि मुख्यमंत्री बुद्धदेव नहीं ममता बनर्जी हैं और उन्हें भी प्रबल जनसमर्थन और बहुमत के दम पर न मीडिया,न जनमत और जनता की कोई परवाह है।वे मानकर चल रही है कि हिजाब की तरह ओढ़नी ओढ़कर,दुआ सलाम अल्ला हाफिज करने से संघ परिवार के साथ उनके गठबंधन का खुलासा हो जाने के बावजूद बंगाल में करीब हर तीसरे सीट पर निर्णायक मुसलमान वोट बैंक उनके सात होगा।


यह गलतफहमी सच्चार आयोग के रपटआ जाने के बाद कामरेडों को भी थी।नतीजा सामने है।


शारदा फर्जीवाड़ा में सफाई में दीदी कांग्रेस और वामदलों को लपेटती रही हैं और बड़ाबाजार फ्लाईओवर कांड के बाद मौके पर पहुंचकर तत्काल उनकी पहली टिप्पणी यही थी कि यह परियोजना ुनकी नहीं है ,बल्कि सीपीएम की है।अब नारद स्टिंग के रोज रोज के खुलासे में मंत्री सांसद मेयर के फंसे होने के मौके पर दीदी कांग्रेस और सीपीएम को घेरने में नाकाम हैं।


संघपरिवार का वरद हस्त भले जितना उदार हो,केद्र की सरकाकर और केंद्रीय एजंसियां भले ही दीदी के हक में हों,बंगाल के भाजपा नेता अपनी छवि और राजनीति खराब करने में मूड में नहीं हैं और रोजाना वे कोी नकोी ऐसा मामला सामने ला रहे हैं कि दीदी को पलटकर जवाब देने का मौका ही नहीं मिल रहा है।


हारकर दीदी ने कल आसनसोल के कुल्टी में जनता से बाकायदा माफी मांग ली और कहा कि सारी गलतियां उन्हीं की हैं और मतदाता उन्हें जरुर माफ करें।


उन्होंने मतदाताओं से बाकायदा गिड़गिड़ाकर तृणमूल को समर्थन जारी रखने की अपील की है।


पहले चरण का ही मतदान हुआ है और खबरों के मुताबिक केंद्रीय वाहिनी के छाता बन जाने से तृणमूल वाहिनी ने मेदिनीपुर में कई इलाकों मे अपने मन की कर ली ,लेकिन पुरुलिया और बांकुड़ा में ऐसा करने का मौका ही नहीं मिला।


मालदह बीरभूम और मध्य बंगाल में हमलावर रवैया अपनाने के बावजूद हवा क्रमशः वाम कांग्रेस गठबंधन की मजबूत होते देखकर,रोज रोज के मीडिया धमाकों और मुसलिम वोट बैंक के टूटने से दीदी की भाषा बदल गयी है।


बहरहाल तृणमूल सुप्रीमो व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को माकपा-कांग्रेस के चुनावी गठबंधन पर कड़ा प्रहार करते हुए मुर्शिदाबाद की जनता से तृणमूल के पक्ष में मतदान करने की अपील की। एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि कांग्रेस ने खुद को माकपा के हाथों बेच दिया है। वर्तमान में माकपा और कांग्रेस एक हो गई है। जिस माकपा ने 55 हजार कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हत्या कराई। कांग्रेस ने उसी के साथ हाथ मिला लिया। कांग्रेस कह रही है माकपा जिन्दाबाद और माकपा कह रही है कांग्रेस जिन्दाबाद। अब कांग्रेस वो कांग्रेस नहीं रह गई है।


तृणमूल सुप्रीमो ने मालदा जिले के सुजापुर में एक जनसभा में किसी का नाम लिए बगैर कहा, ''मालदा से दो और मुर्शिदाबाद से एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने माकपा के सामने अपना सिर झुकाया जिसने कभी राजीवजी के खिलाफ गाली-गलौज वाले शब्दों का इस्तेमाल किया था और अपनी रैलियों में एक नारा बनाया था। क्या वे कांग्रेसजन कहे जाने लायक हैं। ऐसा जान पड़ता है कि इन नेताओं ने अपने निजी हित के लिए वस्तुत: कांग्रेस का झंडा बेच दिया।''


दीदी को सत्ता में बहाली का खेल कराब न हो इसलिए आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मदारीहाट में रैली कर सीएम ममता बनर्जी पर जमकर हमला बोला। मोदी ने अपने भाषण में पुल हादसे और शारदा घोटाले का भी जिक्र किया।


ममता को निशाने पर लेते हुए पीएम ने कहा, मोदी जब से प्रधानमंत्री बने हैं और मीटिंग बुलाते हैं तो दीदी उसका बहिष्कार करती हैं और इसके साथ आपसे भी धोखा करती हैं। दीदी दिल्ली आती हैं तो सोनिया जी का आशीर्वाद जरूर लेती हैं पर गठबंधन तो लेफ्ट-दीदी का है। इनको बंगाल की चिंता नहीं है, गठबंधन की चिंता है।

मोदी का हमला,

प. बंगाल में चुनावी मौसम में रैलियों का दौर तेज हो गया है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मदारीहाट में रैली कर सीएम 



ममता बनर्जी पर जमकर हमला बोला।



--
Pl see my blogs;


Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!