एस्बेस्टेस कारखाने को लेकर SIPB का प्रस्ताव हमारे पास आया है, लेकिन हमने उसे मंज़ूरी नहीं दी है। उस प्रस्ताव को भारत सरकार और पर्यावरण मंत्रालय की अनुमती मिल गई है। राज्य में इस पर बहस भी हो रही है और विरोध भी। लेकिन हमारी मंज़ूरी नहीं मिली है। कोई अपनी ज़मीन पर क्या निर्माण कार्य कर रहा है, उसका हम कुछ नहीं कर सकते।
पुलिस तैनाती पर नीतीश कुमार ने कहा कि ------ पुलिस वाले अब कहीं नहीं जाएगें, मामले पर ठीक से सोच समझ कर फैसला लेने की ज़रुरत है।
देश में कई जगहों पर एस्बेस्टस फैक्ट्री है, राज्य से बाहर भी कारखाने लगा रहे हैं, यहां भी लगा रहे हैं।
एस्बेस्टस फैक्ट्री को राज्य प्रदूषण बोर्ड ने भी अनुमती दे दी, हमारे पास मामला तब आता है जब निवेश मामलों को लेकर रिआयतों की ज़रुरत होती है। इस पर राज्य में कोई प्रतिबंध नहीं है।
राज्य में एस्बेस्टेस कारखाने का मुद्दा विवादित है, हम इस मामले पर कोई समर्थन नहीं कर रहे हैं।
अगर एस्बेस्टेस की फैक्ट्री नहीं लगनी चाहिए तो पूरे देश में नहीं लगनी चाहिए। इस मसले को लेकर एक राष्ट्रीय नीति
बननी चाहिए।
Statement of Bihar Chief Minister Nitish Kumar at a press conference in New Delhi at Indian Women Press Corps on the issue of bitter protest against proposed asbestos plant in Muzaffarpur, Bihar on 2 February 2011.
BiharWatch-Journal of Justice, Jurisprudence and Law is an initiative of Jurists Association (JA), East India Research Council (EIRC), Centre for Economic Philosophy, History and Justice (CEPHJ) and MediaVigil. It publishes research on diverse notions of justice and the performance of just and unjust formal and informal anthropocentric institutions and their design crisis with reference to the first principle. Editor:mediavigil@yahoo.co.in
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